सिंधु का पानी रोका तो जंग होगी? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की भारत को खुली धमकी!”
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर भारत को धमकी दी है। एक पाकिस्तानी समाचार एजेंसी से बातचीत में आसिफ ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा पहुंचता है, तो इस्लामाबाद सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार रहेगा।
आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान के जल संसाधनों को कोई खतरा होता है, तो इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना जाएगा। सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाला पानी पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि इसे खतरा पहुंचा, तो पाकिस्तान भारत के खिलाफ युद्ध जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।”
सीआर पाटिल ने दिया था बड़ा बयान

इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के एक बयान को लेकर भी पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। दरअसल, उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि जून 2028 तक सिंधु नदी का पूरा पानी पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकता है और भारत सिंधु नदी प्रणाली की सभी नदियों के जल का उपयोग अपने हितों के लिए कर सकेगा।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु नदी प्रणाली में छह प्रमुख नदियां—सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज—शामिल हैं।
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। 1947 में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ, जिसके तहत पाकिस्तान को दो प्रमुख नहरों से पानी मिलता रहा।
लगातार बने रहे विवाद को सुलझाने के लिए 1951 से 1960 तक विश्व बैंक की मध्यस्थता में बातचीत चली। आखिरकार 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे सिंधु जल संधि के नाम से जाना जाता है।
इस संधि के तहत छह नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया था।
पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज) भारत के हिस्से में आईं।
पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चिनाब) पाकिस्तान को आवंटित की गईं।
भारत को पश्चिमी नदियों के जल का सीमित उपयोग सिंचाई, घरेलू जरूरतों और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए करने की अनुमति दी गई।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने की थी निलंबित संधि
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया था। इस घटना के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया था, जिसके बाद पाकिस्तान में जल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया था कि जब तक पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन और वित्तपोषण बंद नहीं किया जाता, तब तक संधि सामान्य रूप से लागू नहीं रहेगी।
इसी वजह से सिंधु जल संधि एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख मुद्दा बन गई है। पाकिस्तान की ओर से इस विषय पर लगातार तीखी बयानबाजी सामने आ रही है, जबकि भारत अपने जल अधिकारों के अधिकतम उपयोग की बात कर रहा है।