संसद में हंगामा और प्रधानमंत्री का भाषण रुकने का विवाद: आखिर हुआ क्या?
लोकसभा में हाल ही में जो घटनाक्रम देखने को मिला, उसने राजनीति में हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित भाषण अचानक नहीं हो पाया और इसके पीछे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा दावा किया गया।
इस दावे के सामने आते ही विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, ने तीखी प्रतिक्रिया दी और पूरे आरोपों को नकार दिया।
तो सवाल उठता है—
क्या सच में कोई सुरक्षा खतरा था?
या यह सिर्फ राजनीतिक टकराव का नतीजा था?
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
संसद में प्रधानमंत्री के संबोधन से ठीक पहले कांग्रेस की कुछ महिला सांसदों द्वारा बैनर-पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसी दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि कुछ सांसद प्रधानमंत्री के आसन तक पहुँच सकते हैं और कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती है।
उनके मुताबिक, हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी गई।
सरकारी पक्ष ने इसे सिर्फ सुरक्षा से जुड़ा एहतियाती फैसला बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?
- उन्हें पहले से इनपुट मिला था कि स्थिति बिगड़ सकती है।
- कुछ सांसद प्रधानमंत्री के पास पहुँचने की कोशिश कर सकते थे।
- इसी आशंका के कारण उन्हें रोकने का फैसला लिया गया।
सरकार का कहना है कि जब शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की बात हो, तो थोड़ी-सी भी आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने इन आरोपों को बेहद गंभीर लेकिन पूरी तरह गलत बताया।
- प्रधानमंत्री पर हमला करने जैसी कोई मंशा नहीं थी।
- यह आरोप विपक्ष को बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं।
- सरकार इस पूरे मामले में लोकसभा अध्यक्ष को आगे कर रही है।
उनका दावा है कि अगर खतरा इतना बड़ा था, तो फिर कोई औपचारिक शिकायत या FIR क्यों नहीं हुई?
सदन में गरमाया माहौल
वीडियो रिपोर्ट में संसद के भीतर बेहद तनावपूर्ण दृश्य दिखाए गए:
- कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री के मार्ग में विरोध किया।
- बीजेपी ने इसे भाषण रोकने की कोशिश बताया।
- सत्ता पक्ष ने इसे संसदीय इतिहास की असाधारण घटना करार दिया।
इसी दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली।
किताब को लेकर भी तकरार
सत्र के दौरान एक और मुद्दा उठा—पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे की किताब को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
इससे माहौल और ज्यादा गरमा गया और संसद का कामकाज बार-बार बाधित होता रहा।
मीडिया रिपोर्ट्स में क्या कहा गया?
मीडिया में यह भी सामने आया कि प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी गई थी और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव उनके बिना ही पारित हो गया। यह जानकारी NDTV की रिपोर्ट के हवाले से बताई गई।
FIR और कानूनी सवाल
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है:
- अगर सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका थी, तो क्या पुलिस या किसी एजेंसी के पास कोई लिखित शिकायत दी गई?
- क्या इस आधार पर FIR दर्ज हुई?
- क्या खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
विपक्ष का कहना है कि जब तक कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आती, तब तक आरोपों पर सवाल उठते रहेंगे। वहीं सरकार का तर्क है कि सुरक्षा से जुड़ी कई जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं की जातीं।
आगे क्या हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक:
- यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
- संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे।
- विपक्ष जांच की मांग कर सकता है।