कांग्रेस की बैठक में गूंजा ‘आमार सोनार बांग्ला’! असम में बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाने पर विवाद
असम के श्रीभूमि जिले में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कांग्रेस नेता बिधु भूषण दास ने बैठक की शुरुआत में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान “अमार सोनार बांग्ला” गीत गाया है। यह घटना इंदिरा भवन में हुई, जहां जिला सेवा दल की बैठक चल रही थी।
बीजेपी बोली “बांग्लादेश-प्रेमी” पार्टी है कांग्रेस
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। असम बीजेपी ने एक्स पर लिखा कि “कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश ने अपने नक्शे में पूर्वोत्तर भारत को शामिल किया था, और अब कांग्रेस उसी देश का राष्ट्रगान गा रही है।” पार्टी ने कांग्रेस को “बांग्लादेश-प्रेमी” करार दिया और कहा कि “जो लोग इसे नहीं समझते, वे या तो अंधे हैं या इस एजेंडे का हिस्सा हैं।”
राज्य के मंत्री अशोक सिंघल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “यह वही बांग्लादेश है जो पूर्वोत्तर को भारत से अलग करना चाहता है, और कांग्रेस उसी देश का राष्ट्रगान गा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा दिया ताकि वोट बैंक की राजनीति के लिए असम की जनसंख्या संरचना बदली जा सके और “ग्रेटर बांग्लादेश” की साजिश को मजबूत किया जा सके।
उग्रवाद के उकसावे की कोशिश
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस पर राज्य के विकास के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि असम के युवा फिर से उग्रवाद की राह पर लौटें। सरमा ने कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के दबाव में निवेशकों को कर्नाटक की बजाय गुजरात और असम भेजा जा रहा है। सरमा ने कहा, “क्या कांग्रेस को लगता है कि उद्योग लगाना उसका जन्मसिद्ध अधिकार है?”

गीत का इतिहास
गीत “अमार सोनार बांग्ला” मशहूर कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में लिखा था। यह गीत उस समय एकता और देशभक्ति का प्रतीक बना। 1971 में जब बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ, तो उसने इसी गीत को अपना राष्ट्रीय गान बनाया।
असम की बराक घाटी, जो बांग्लादेश की सीमा से सटी है, में बड़ी संख्या में बंगाली भाषी लोग रहते हैं। इस क्षेत्र में “अमार सोनार बांग्ला” गीत कई बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।