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जम्मू में क्रिकेट मैच के दौरान हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा! खिलाड़ी फुरकान भट्ट को पुलिस ने किया तलब

जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग में खिलाड़ी फुरकान भट्ट से पुलिस पूछताछ, आयोजकों से भी जवाब तलब

जम्मू में आयोजित जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग इन दिनों क्रिकेट से ज्यादा एक बड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में है। इस लीग के एक मुकाबले के दौरान खिलाड़ी फुरकान भट्ट के हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा नजर आया, जिसके बाद मामले ने विवाद का रूप ले लिया है। तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

 

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, जम्मू में चल रही जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग के एक मैच के दौरान फुरकान भट्ट बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरे थे। इसी दौरान उनके हेलमेट पर फिलिस्तीन के झंडे का स्टीकर देखा गया। मैच के दौरान ली गई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इसके बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई और देखते ही देखते यह मामला पुलिस तक पहुंच गया।
इस घटना को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या किसी क्रिकेट मैच के दौरान इस तरह के राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस घटना के बाद से सुरक्षा को लेकर एजेंसियां भी सतर्क हो गईं।

 

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया और जांच तेज कर दी। पुलिस ने खिलाड़ी फुरकान भट्ट को पूछताछ के लिए तलब किया है। उनसे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा लगाने के पीछे उनकी मंशा क्या थी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है –

  • क्या इसके लिए लीग आयोजकों से पहले कोई अनुमति ली गई थी।
  • क्या यह लीग के नियमों और आचार संहिता के अनुरूप था।
  • क्या इस तरह की गतिविधि से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामला संवेदनशील है, इसलिए हर पहलू से जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को परखा जाएगा। सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग के आयोजक भी अब पुलिस के रडार पर हैं। लीग के आयोजक जाहिद भट से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों की यूनिफॉर्म, हेलमेट और अन्य उपकरणों को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन तय की गई थी या नहीं। सूत्रों के अनुसार, आयोजकों से यह भी पूछा जा रहा है कि क्या खिलाड़ियों को किसी तरह के प्रतीक, झंडे या संदेश इस्तेमाल करने की अनुमति थी। अगर थी, तो इसके लिए क्या नियम बनाए गए थे और क्या वे नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू थे।

सोशल मीडिया से बढ़ा बवाल

इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब फुरकान भट्ट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी-अपनी राय रखने लगे। कुछ लोगों ने इसे निजी अभिव्यक्ति बताया, तो वहीं कई लोगों ने इसे खेल के मंच पर गलत और नियमों के खिलाफ करार दिया । सोशल मीडिया पर बहस तेज होते ही पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई, क्योंकि किसी भी तरह की गलत जानकारी या भावनात्मक प्रतिक्रिया से माहौल बिगड़ सकता था।

लीग की वैधता पर सवाल

इस विवाद के बीच जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के प्रशासनिक सदस्य और सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने भी अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग न तो बीसीसीआई और न ही जेकेसीए से मान्यता प्राप्त है। उनके अनुसार, ऐसे निजी और गैर-मान्यता प्राप्त टूर्नामेंट में आधिकारिक क्रिकेट नियम सीधे तौर पर लागू नहीं होते। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी खिलाड़ी को अपने हेलमेट या जर्सी पर केवल उसी बोर्ड या संस्था का लोगो लगाने की अनुमति होती है, जिसका वह आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व करता है।

 

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने यह भी कहा कि “अगर जाहिद भट इस लीग के आयोजक हैं, तो टूर्नामेंट को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित करना उनकी जिम्मेदारी है।” किसी भी निजी लीग में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खेल का माहौल विवादों से दूर रहे और सामाजिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे आयोजक को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, लेकिन किसी भी तरह के आयोजन में नियम और जिम्मेदारी सबसे जरूरी होती है।”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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