SIR की समयसीमा खत्म होते ही चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल, 31 दिसंबर से शुरू होगी दावा-आपत्ति प्रक्रिया

देश भर में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया लगभग 12 राज्यों में पूर्ण हो चुकी है । अब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चल रहा ये अभ्यास सबसे अपने अहम मोड़ पर पहुंच चुका है। चुनाव आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की समयसीमा 26 दिसंबर की रात 12 बजे खत्म हो गई है। तय समय तक फॉर्म जमा न करने वाले करोड़ों मतदाताओं के नाम अब मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। चुनाव आयोग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की संभावना है। हालांकि आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक साफ, सही और भरोसेमंद बनाने के लिए जरूरी है।
डेडलाइन खत्म, अब नहीं मिलेगा और मौका
SIR के तहत फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 26 दिसंबर तय की गई थी। इससे पहले दो बार समयसीमा बढ़ाई गई, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता फॉर्म नहीं भर सके।
चुनाव आयोग के अनुसार –
- 11 दिसंबर तक लगभग 2.91 करोड़ मतदाता फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे।
- इसके बाद मिले अतिरिक्त 15 दिनों में सिर्फ करीब 10 लाख लोगों ने ही फॉर्म भरे।
- इसी वजह से संभावित कटने वाले नामों की संख्या घटकर 2.89 करोड़ रह गई।
- आयोग ने साफ कर दिया है कि अब समयसीमा आगे नहीं बढ़ेगी।
क्यों हटाए जा रहे हैं इतने बड़े पैमाने पर नाम?
मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि बड़ी संख्या में मतदाता अब अपने पुराने पते पर मौजूद नहीं हैं या उनका नाम दो जगह दर्ज है।
- स्थानांतरित मतदाता: करीब 1.26 करोड़
- अनुपस्थित मतदाता: लगभग 83–84 लाख
- मृत मतदाता: करीब 46 लाख
- डुप्लीकेट एंट्री: लगभग 23–24 लाख
- अन्य कारण: करीब 9.5 लाख
खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से रोज़गार के लिए शहरों में आए लोगों ने दो जगह वोटर आईडी बनवा ली थी। इस बार गहन जांच में ऐसी डुप्लीकेट एंट्रियों को हटाया गया है।
1.11 करोड़ वोटरों को मिलेगा नोटिस
चुनाव आयोग ने बताया है कि लगभग 1.11 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे। इन मतदाताओं का रिकॉर्ड अधूरा पाया गया है या उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं को आयोग द्वारा मान्य 13 दस्तावेजों में से किसी एक को जमा करना होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद ही उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
शहरी जिलों में ज्यादा असर, लखनऊ सबसे आगे
SIR का सबसे ज्यादा असर शहरी और औद्योगिक जिलों में देखने को मिला है, जहां पलायन और अस्थायी निवास आम है।
लखनऊ की स्थिति चिंताजनक है
- कुल पंजीकृत मतदाता: करीब 39 लाख
- ‘अनकलेक्टेबल’ मतदाता: लगभग 12 लाख (30%)
- इनमें बड़ी संख्या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और ट्रेस न हो पाने वाले मतदाताओं की है।
- नोएडा और गाजियाबाद में भी गंभीर हालात
- नोएडा: 1.8 लाख
- गाजियाबाद: 1.6 लाख
कुल मिलाकर करीब 3.5 लाख वोटर अनमैप्ड पाए गए हैं।
सिद्धार्थनगर में 4 लाख नाम कटने की आशंका
पूर्वांचल के सिद्धार्थनगर जिले में भी बड़ी संख्या में नाम कटने की संभावना जताई जा रही है।
- मृत घोषित मतदाता: 77,664
- स्थानांतरित मतदाता: 1,04,768
- मैपिंग से बाहर मतदाता: 2.32 लाख
कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। प्रशासन अब विशेष सुधार अभियान चलाकर पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

क्या हैं पूरा शेड्यूल
चुनाव आयोग ने आगे की प्रक्रिया का पूरा कैलेंडर जारी कर दिया है
- 31 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी
- 31 दिसंबर 2025 – 30 जनवरी 2026: दावा और आपत्तियों की अवधि
- 31 दिसंबर 2025 – 21 फरवरी 2026: फॉर्म पर निर्णय
- 28 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची जारी
इस दौरान जिनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं होगा, वे तय प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
मैप-लिंकिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
मतदाता सूची को ज्यादा सटीक बनाने के लिए चुनाव आयोग ने एक नई मैप-लिंकिंग प्रक्रिया शुरू की है। इसमें मतदाता के नाम को माता-पिता और दादा-दादी या नाना-नानी से जोड़ा जा रहा है। यह प्रक्रिया अब तक 75% पूरी हो चुकी है और इससे फर्जी या गलत प्रविष्टियों को रोकने में मदद मिलेगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद तुरंत अपना नाम जांचें। अगर नाम कट गया हो तो फॉर्म-6 भरकर और जरूरी दस्तावेज जमा करके दोबारा शामिल कराया जा सकता है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी जांच किसी को मतदान से वंचित करने के लिए नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और भरोसेमंद बनाने के लिए की जा रही है।