गिफ्ट नहीं, बढ़ा किराया – नए साल से पहले रेलवे का यात्रियों को झटका
नए साल का सफर पड़ेगा महंगा! क्रिसमस से पहले रेलवे ने बदल दिया किराया

नया साल आने में महज एक हफ्ता ही बचा है। ये वक्त हमेशा खुशियों, छुट्टियों, घर लौटने और घूमने-फिरने की योजनाओं से जुड़ा होता है। लोग अपनों के लिए तोहफे खरीदते हैं,जश्न भरे माहौल में कंपनियां डिस्काउंट का ऐलान करती हैं लेकिन इसी बीच भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार नए साल से पहले ही किराए में बढ़ोतरी करने जा रही हैं।
26 दिसंबर 2025 से इंडियन रेलवे अपने यात्री किराए के ढांचे में बदलाव करने जा रहा है। इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ेगा, जो ट्रेन से लंबी दूरी का सफर करते हैं। रेलवे का कहना है कि यह बढ़ोतरी बहुत सीमित है और इसका मकसद यात्रियों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि बढ़ती परिचालन लागत और सुरक्षा जरूरतों को संतुलित करना है।
क्या है नया किराया ढांचा?
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, 26 दिसंबर से लागू होने वाले इस नए किराया ढांचे में कुछ अहम बातें साफ तौर पर सामने आती हैं। सबसे पहले राहत की खबर सब-अर्बन ट्रेनों और मासिक सीजन टिकट (MST) के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। इसके अलावा, 215 किलोमीटर तक की दूरी के लिए ऑर्डिनरी क्लास के किराए में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत मिलती रहेगी।
हालांकि, 215 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने पर किराया थोड़ा बढ़ेगा। ऑर्डिनरी क्लास में ऐसी यात्राओं के लिए प्रति किलोमीटर 1 पैसा अतिरिक्त देना होगा। वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी क्लास में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। एसी क्लास में भी यही 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी लागू होगी। रेलवे ने एक उदाहरण देकर इसे समझाने की कोशिश की है। अगर कोई यात्री नॉन-एसी कोच में 500 किलोमीटर का सफर करता है, तो उसे पूरे सफर के लिए सिर्फ 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। यानी बढ़ोतरी मामूली है, लेकिन कुल मिलाकर इससे रेलवे को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
600 करोड़ का लक्ष्य
इस किराया ‘रैशनलाइजेशन’ से रेलवे ने करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। रेलवे का कहना है कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है, बल्कि बीते एक दशक में नेटवर्क के बड़े विस्तार और ऑपरेशन्स के बढ़ते स्तर को देखते हुए लिया गया फैसला है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को काफी बढ़ाया है। नई लाइनें, ज्यादा ट्रेनें, बेहतर सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों पर बड़ा निवेश किया गया है। इसके साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने के लिए मैनपावर भी बढ़ाई गई है।

बढ़ती लागत की सच्चाई
रेलवे के मुताबिक, मैनपावर बढ़ाने से खर्च भी तेजी से बढ़ा है। मौजूदा समय में रेलवे का मैनपावर कॉस्ट करीब 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। पेंशन पर होने वाला खर्च भी बढ़कर करीब 60 हजार करोड़ रुपये हो गया है। कुल मिलाकर 2024 – 2025 में रेलवे के परिचालन खर्च 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इन बढ़ते खर्चों को संतुलित करने के लिए रेलवे दो मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ माल ढुलाई (कार्गो) से ज्यादा राजस्व जुटाने की कोशिश, और दूसरी तरफ यात्री किराए में बेहद सीमित और संतुलित बढ़ोतरी।
रेल मंत्रालय के अनुसार
रेल मंत्रालय का दावा है कि इन प्रयासों का असर जमीन पर दिख भी रहा है। बीते वर्षों में रेलवे ने सुरक्षा के स्तर में बड़ा सुधार किया है। बेहतर ट्रैक मेंटेनेंस, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ की वजह से दुर्घटनाओं में कमी आई है। यही वजह है कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कार्गो ढोने वाला रेलवे नेटवर्क बन चुका है। हाल ही में त्योहारों के मौसम के दौरान 12 हजार से ज्यादा ट्रेनों का सफल संचालन भी रेलवे की बढ़ी हुई परिचालन दक्षता का उदाहरण माना जा रहा है।
त्योहारों पर स्पेशल ट्रेनें
किराया बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे ने यह भी साफ किया है कि यात्रियों की सुविधा उसके लिए प्राथमिकता बनी हुई है। क्रिसमस और नए साल के मौके पर देशभर में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है। दिल्ली, हावड़ा, लखनऊ और आसपास के शहरों को जोड़ने वाले व्यस्त रूटों पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा रही हैं। वहीं, मुंबई-गोवा (कोंकण) रूट पर मुंबई CSMT और LTT से करमाली और मडगांव के बीच रोजाना और साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। मुंबई-नागपुर, पुणे-सांगानेर और महाराष्ट्र के अन्य रूटों पर भी अतिरिक्त सेवाएं शुरू की गई हैं।
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