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तेज रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौत: असम में दर्दनाक हादसा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

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तेज रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौत: असम में दर्दनाक हादसा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

असम के घने जंगलों में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षणकर्ताओं को झकझोर दिया है। 20 दिसंबर 2025 को सुबह-सुबह, सैरंग से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन ने एक हाथियों के झुंड से टक्कर मार दी, जिसमें 7 जंगली एशियाई हाथियों की मौत हो गई और एक छोटा बच्चा हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा गुवाहाटी से करीब 125 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में चांगजुराई गांव के पास हुआ, जहां ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर के इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बावजूद टक्कर टाली नहीं जा सकी। सोशल मीडिया पर इस हादसे का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रेन के डिरेलमेंट और हाथियों की दर्दनाक स्थिति दिखाई दे रही है।


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घटना की विस्तृत जानकारी के अनुसार, ट्रेन में सवार करीब 650 यात्री थे, लेकिन सौभाग्य से किसी इंसान को चोट नहीं आई। ट्रेन के इंजन और पांच कोच पटरी से उतर गए, जिससे रेल यातायात कुछ घंटों के लिए बाधित रहा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ड्राइवर ने हाथियों के झुंड को देखते ही ब्रेक लगाए, लेकिन ट्रेन की गति के कारण कुछ हाथियों को कुचल दिया गया। हाथियों का झुंड लगभग 100 की संख्या में था, जो जंगल से ट्रैक पार कर रहा था। यह इलाका जंगली हाथियों का प्राकृतिक आवास है, लेकिन रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह कोई अधिकृत एलिफेंट कॉरिडोर नहीं है। पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत हाथियों का पोस्टमॉर्टम किया और उनके शवों को नमक छिड़ककर दफनाया गया, ताकि तेजी से विघटन हो सके।

यह हादसा असम में हाथी-ट्रेन टक्कर की बढ़ती समस्या को उजागर करता है। असम में भारत के कुल जंगली एशियाई हाथियों की आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है – अनुमानित 7,000 हाथी। फसल कटाई के मौसम में हाथी अक्सर जंगल से बाहर निकलकर मानव बस्तियों या रेल ट्रैकों की ओर आ जाते हैं, जहां वे चावल के खेतों की तलाश में भटकते हैं। 2020 से अब तक असम में कम से कम 12 हाथी ट्रेनों की चपेट में आकर मारे जा चुके हैं। पूरे भारत में रेलवे ट्रैकों पर हाथियों की मौत की संख्या चिंताजनक है – 2020 से 2025 तक सैकड़ों मामले दर्ज हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे लाइनों का विस्तार जंगलों से होकर गुजरने के कारण ऐसी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस घटना को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। यूजर्स ने वन्यजीव संरक्षण की मांग की है, साथ ही रेलवे पर सवाल उठाए हैं कि क्यों ट्रेनों की स्पीड को जंगली इलाकों में नियंत्रित नहीं किया जाता। कई एनजीओ और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि एलिफेंट कॉरिडोर में ओवरपास या अंडरपास बनाए जाएं, साथ ही सेंसर-आधारित अलर्ट सिस्टम लगाए जाएं। भारतीय रेलवे के प्रवक्ता कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है और यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेन से गुवाहाटी पहुंचाया गया, जहां से ट्रेन ने दिल्ली की यात्रा जारी रखी।

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यह घटना हमें पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की याद दिलाती है। हाथी जैसे संरक्षित प्राणी भारत की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन मानव गतिविधियां उन्हें खतरे में डाल रही हैं। सरकार और रेलवे को मिलकर ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जो वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो हाथियों की आबादी पर गंभीर असर पड़ सकता है। सोशल मीडिया यूजर्स से अपील है कि वायरल वीडियो शेयर करने के साथ-साथ संरक्षण अभियानों में हिस्सा लें। यह हादसा एक चेतावनी है – हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना सीखना होगा।

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