Search

बिहार में सड़क चौड़ीकरण को लेकर गांवों में भारी विरोध: किसानों ने जमीन अधिग्रहण पर सवाल उठाए, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

बिहार में सड़क चौड़ीकरण को लेकर गांवों में भारी विरोध, वीडियो वायरल

बिहार के कई जिलों में विकास परियोजनाओं के नाम पर सड़क चौड़ीकरण और नेशनल हाईवे विस्तार को लेकर ग्रामीणों और किसानों में तीव्र विरोध देखने को मिल रहा है। हाल ही में पटना, कैमूर, रोहतास और गया जिलों से जुड़े एनएच-31, एनएच-22 और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसान सड़कों पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ग्रामीणों को सड़क जाम करते, नारे लगाते और पुलिस के साथ बहस करते देखा जा सकता है, जिससे पूरे राज्य में चर्चा छिड़ गई है।

विरोध का मुख्य कारण: भूमि अधिग्रहण और मुआवजा

किसानों का आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीनें बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित कर रही है। 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर सर्कल रेट के आधार पर कम राशि दी जा रही है। कैमूर जिले में पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत जैसे प्रमुख नेता विरोध का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन ली जा रही है, लेकिन किसानों को कोई वैकल्पिक रोजगार या सेवा रोड नहीं मिल रही।

एक वायरल वीडियो में पटना के बुद्धा पार्क से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करते हजारों किसानों को दिखाया गया है, जहां वे “जमीन दो, मुआवजा दो” जैसे नारे लगा रहे हैं। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका, जिससे हल्की झड़प हुई। किसान नेता सुधर सिंह ने कहा, “यह विकास नहीं, किसानों का विनाश है। हमारी जमीन छीनकर बड़े प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे हैं, लेकिन हमें गरीबी में धकेल दिया जा रहा है।”

बिहार में सड़क चौड़ीकरण को लेकर गांवों में भारी विरोध, वीडियो वायरल

हाल की घटनाएं और वायरल वीडियो

हाल के महीनों में एनएच-22 (जहानाबाद-गया) पर 100 करोड़ की चौड़ीकरण परियोजना में पेड़ों को बीच में छोड़कर सड़क बनाई गई, जिससे वीडियो वायरल हो गया। किसानों ने इसे “बेवकूफी भरा विकास” बताया। इसी तरह, पटना के आसपास के गांवों में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन हुए। एक वीडियो में किसान सड़क पर बैठे हैं, ट्रैफिक जाम कर रहे हैं और पुलिस से बातचीत कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इसे “किसानों की आवाज” कह रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से उनकी आजीविका खतरे में है। कई परिवारों की जमीनें चली गईं, लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला। पर्यावरणविदों का भी कहना है कि जंगलों और कृषि भूमि को नजरअंदाज कर सड़कें बनाई जा रही हैं, जो लंबे समय में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी।

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार ने कहा है कि सभी परियोजनाएं केंद्र की मंजूरी से चल रही हैं और मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी है। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने विधानसभा में बताया कि एनएच-31 के कई सेक्शन में काम तेजी से चल रहा है। लेकिन किसानों का विरोध जारी है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत रहने की अपील की है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ी तो सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

यह विरोध बिहार में विकास और किसान हितों के बीच संतुलन की कमी को उजागर करता है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं, “विकास चाहिए, लेकिन किसानों की जमीन पर नहीं।” अगर सरकार जल्द मुआवजे और संवाद नहीं बढ़ाती, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

कौन है नितिन नबीन ! जिन्हें सौंपी गई है BJP के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी, कैसा रहा अब तक का सियासी सफर!

admin

Hi I am admin

Leave a Comment

Your email address will not be published.