Search

क्या मुस्लिम समुदाय में ग़रीबी हिंदुओं से कम है ? भारत में इन 5 राज्यों और UTs में ज़ीरो ग़रीबी की क्या है सच्चाई !

नई रिसर्च रिपोर्ट का दावा—12 साल में 22% से घटकर 2% रह गई गरीबी, हिंदू-मुस्लिम, गांव-शहर का अंतर लगभग खत्म!

                                                                                   भारत आज सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश की जीडीपी 4.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है और 2025-26 में आर्थिक वृद्धि दर करीब 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। तेज़ विकास के इन आंकड़ों के बीच लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या आर्थिक तरक्की का फायदा देश के गरीब तबके तक भी पहुंचा है। इस सवाल का जवाब एक नई रिसर्च रिपोर्ट में मिलता है, जिसे कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और अर्थशास्त्री विशाल मोरे ने तैयार किया है। यह शोध पत्र Economic & Political Weekly में प्रकाशित हुआ है और इसमें भारत में गरीबी को लेकर कुछ ऐसे निष्कर्ष सामने आए हैं, जो आम धारणा को चुनौती देते हैं।

रिपोर्ट का सबसे बड़ा दावा

रिसर्च के मुताबिक, 2011-12 से 2023-24 के बीच भारत ने गरीबी घटाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। लेखकों का कहना है कि इस अवधि में गरीबी में तेज़ और व्यापक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश लगभग अत्यधिक गरीबी मुक्त होने की स्थिति में पहुंच गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी के आंकड़े

  • 2011-12 में गरीबी दर: 21.9%
  • 2023-24 में गरीबी दर: 2.3%
  • 12 सालों में गिरावट: करीब 19.7 प्रतिशत

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट सिर्फ औसत आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सामाजिक, धार्मिक और क्षेत्रीय स्तर पर भी साफ दिखाई देता है।

गरीबी मापने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल हुआ

इस अध्ययन में गरीबी मापने के लिए तेंदुलकर गरीबी रेखा और घरेलू उपभोग व्यय सर्वे (HCES) का उपयोग किया गया है। तेंदुलकर गरीबी रेखा भारत में गरीबी मापन का आखिरी आधिकारिक मानक रही है, जबकि HCES सर्वे घर-घर जाकर लोगों के खर्च से जुड़ी जानकारी देता है। विश्व बैंक के अनुसार, क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर रोजाना 3 डॉलर से कम पर जीवनयापन करने वालों को अत्यधिक गरीबी की श्रेणी में रखा जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सीमा भारत की तेंदुलकर गरीबी रेखा के करीब है।

हिंदू और मुस्लिम समुदायों के आंकड़ों ने बदली सोच

रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा हिंदू और मुस्लिम समुदायों में गरीबी के आंकड़े हैं। लंबे समय से यह धारणा रही है कि मुस्लिम समुदाय में गरीबी ज्यादा है, लेकिन इस रिसर्च के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।

हिंदू और मुस्लिम समुदाय में अत्यधिक गरीबी

  • 2022-23 में मुस्लिम: 4%, हिंदू: 4.8%
  • 2023-24 में मुस्लिम: 1.5%, हिंदू: 2.3%

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों समुदायों में गरीबी तेज़ी से घटी है और उनके बीच का अंतर लगभग खत्म हो चुका है।

ग्रामीण इलाकों में गिरावट ज्यादा तेज़

रिसर्च बताती है कि गरीबी में गिरावट शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा तेज़ रही है। 2011-12 में ग्रामीण इलाकों में गरीबी का स्तर राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा था, लेकिन इसके बाद यहां बड़ा सुधार देखने को मिला।

ग्रामीण और शहरी गरीबी में गिरावट

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कुल गिरावट: 22.5 प्रतिशत
  • शहरी क्षेत्रों में कुल गिरावट: 12.6 प्रतिशत
  • शहरी भारत में भी अंतर लगभग खत्म

शहरी इलाकों में भी हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच गरीबी का अंतर अब लगभग खत्म हो चुका है। 2011-12 में शहरी मुस्लिमों में गरीबी काफी ज्यादा थी, लेकिन समय के साथ इसमें तेज़ गिरावट आई है।

शहरी क्षेत्रों में गरीबी दर

  • 2011-12 में मुस्लिम: 20.8%, हिंदू: 12.5%
  • 2023-24 में मुस्लिम: 1.2%, हिंदू: 1%

 

सामाजिक वर्गों में भी बड़ा सुधार

रिपोर्ट में सामाजिक वर्गों के आधार पर भी गरीबी का विश्लेषण किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग सभी में गरीबी में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।

अनुसूचित जनजाति (ST) में गरीबी

  • 2023-24 में गरीबी दर: 8.7%

हालांकि यह दर अब भी अन्य वर्गों से ज्यादा है, लेकिन 2011-12 के मुकाबले इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

अन्य धार्मिक समुदायों की स्थिति

रिपोर्ट में अन्य धार्मिक समुदायों के आंकड़े भी सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि गरीबी में गिरावट व्यापक रही है।

धार्मिक समुदायों में गरीबी दर (2023-24)

  • हिंदू: 2.3%
  • मुस्लिम: 1.5%
  • ईसाई: 5%
  • बौद्ध: 3.5%

कई राज्यों में गरीबी लगभग खत्म

राज्यवार विश्लेषण में भी बड़े बदलाव दिखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गरीबी दर लगभग शून्य के करीब पहुंच चुकी है।

  1. जहां गरीबी लगभग शून्य है।
  2. राज्य: हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, गोवा।
  3. केंद्र शासित प्रदेश: चंडीगढ़, दिल्ली, दमन-दीव।

रिपोर्ट क्या संकेत देती है

अरविंद पनगढ़िया और विशाल मोरे के मुताबिक, 2011-12 से 2023-24 के बीच भारत ने गरीबी घटाने में असाधारण प्रगति की है। गरीबी में गिरावट तेज़ रही है और इसका फायदा लगभग सभी समुदायों और क्षेत्रों तक पहुंचा है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि अब अत्यधिक गरीबी मुख्य रूप से कुछ आदिवासी इलाकों और सीमित आबादी तक सिमट गई है, जहां आगे नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत होगी। तेज़ आर्थिक विकास को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि इसका लाभ किसे मिला। यह रिसर्च के अनुसार भारत में पिछले 12 वर्षों के दौरान आर्थिक वृद्धि का असर गरीबी कम होने के रूप में भी सामने आया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

Leave a Comment

Your email address will not be published.