2025 का साल – ट्रंप के फैसलों से हिली दुनिया, भारत-चीन नज़दीक आए, गाज़ा में नई उम्मीदें
अमेरिका की आक्रामक नीतियों से वैश्विक तनाव गहरा, लेकिन इसी साल भारत-चीन की नज़दीकियाँ बढ़ीं, भारत-यूके डील ने नई आर्थिक राह खोली

साल 2025 दुनिया के लिए बेहद हलचल भरा रहा। जनवरी से दिसंबर के बीच कई बड़े फैसले हुए, जिसने कई देशों की राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति को गहराई तक प्रभावित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार सत्ता में आते ही दुनिया को एक नए दौर में धकेल दिया। जहां व्यापारिक दबाव, प्रवासी विवाद, कड़ा कूटनीतिक रवैया और सैन्य धमकियां देखने को मिली । वहीँ, एशिया में भारत और चीन के रिश्तों में अप्रत्याशित सुधार ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। इसके साथ ही, गाज़ा में जारी संघर्ष का समाधान ढूंढने की कोशिशों ने साल के अंत में एक नई उम्मीद जगाई। कुल मिलाकर, यह साल ऐसे फैसलों, घटनाओं और बदलावों से भरा रहा, जो आने वाले कई वर्षों तक असर छोड़ने वाले हैं।
ट्रंप का टैरिफ तूफान
20 जनवरी 2025 को जब डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली, उसी दिन से वैश्विक आर्थिक माहौल में हलचल शुरू हो गई थी। लेकिन असली झटका तब लगा जब 2 अप्रैल को उन्होंने 90 से ज़्यादा देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। यह फैसला अचानक था, और इससे दुनिया भर के बाज़ारों में अफरा-तफरी मच गई।
भारत और ब्राजील को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि दोनों पर साफ-साफ 50% टैरिफ लगा दिया गया। भारत पर लगे टैरिफ के दो कारण बताए गए। एक, रेसिप्रोकल जवाब; दूसरा, रूस से लगातार बढ़ती तेल खरीद। कई देश अमेरिका के दबाव में झुक गए और ट्रंप के साथ नई ट्रेड डील्स पर सहमत हो गए। लेकिन भारत ने इस दबाव का सामना किया और बातचीत जारी रखी। इस वजह से वॉशिंगटन और नई दिल्ली के रिश्तों में खींचतान भी देखने को मिली , हालांकि दोनों देशों के अधिकारी लगातार बातचीत करते रहे।
अवैध प्रवासियों की जबरन निकासी, हथकड़ी और बेड़ियों में भेजे गए लोग
ट्रंप प्रशासन का सबसे विवादित कदम अवैध प्रवासियों को जबरन अमेरिका से निकालने का था। यह कदम पहले ट्रंप के चुनावी वादों का हिस्सा था, लेकिन 2025 में इसे बेहद कठोर तरीके से लागू किया गया। अमेरिका ने कई देशों के नागरिकों को सेना के विमानों में बैठाकर वापस भेजा। हैरानी की बात यह थी कि इन्हें हथकड़ी और पैरों में बेड़ियाँ लगाकर भेजा गया। भारत के भी सैकड़ों नागरिक इनमें शामिल थे।
दुनिया में सबसे बड़ा विरोध कोलंबिया ने किया। उसने अमेरिकी सैन्य विमान को अपने एयरपोर्ट पर उतरने से मना कर दिया। ट्रंप इस फैसले से नाराज़ हुए और कोलंबिया पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे डाली। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका और कोलंबिया के बीच तनाव पूरे साल कायम रहा। अमेरिका ने ब्राजील, भारत, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडूरास के हजारों प्रवासियों को वापस भेजा, और यह मुद्दा 2025 की सबसे चर्चित वैश्विक घटनाओं में गिना गया।

भारत–चीन रिश्तों में अप्रत्याशित सुधार
2025 की सबसे सकारात्मक खबरों में एक भारत और चीन के रिश्तों में आई गर्माहट रही। दोनों देशों के बीच 2020 के बाद से मतभेद लगातार बढ़ते रहे थे, लेकिन इस साल हालात नई दिशा लेने लगे। चीन के विदेश मंत्री और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की यात्राओं ने नई जमीन तैयार की। इसके बाद कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त 2025 को सात साल बाद चीन पहुंचे।
यह दौरा शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के शिखर सम्मेलन का हिस्सा था, लेकिन इसका राजनीतिक और आर्थिक महत्व इससे कहीं बड़ा था। दुनिया भर में चर्चा इस बात की थी कि जब ट्रंप भारत पर भारी टैरिफ लगा चुके हैं, तब भारत का चीन के साथ बढ़ता संवाद अमेरिका-चीन-भारत समीकरण को कैसे बदल देगा। साल 2020 से बंद पड़ी भारत-चीन सीधी उड़ानें भी 2025 में फिर शुरू हुईं। इससे दोनों देशों के व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई रफ्तार मिली।
भारत–यूके फ्री ट्रेड डील – नए आर्थिक युग की शुरुआत
ट्रंप टैरिफ से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत ने ब्रिटेन के साथ एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने का फैसला किया। इसी कड़ी में 2025 में भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन हुआ, जिसे दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका था, और ब्रिटेन भारतीय बाज़ार में अपनी मजबूत मौजूदगी चाहता था। डील के तहत भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में टैरिफ खत्म कर दिया गया। कृषि उत्पाद, समुद्री भोजन, टेक्सटाइल, लेदर और प्रोसेस्ड फूड्स को ब्रिटेन में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 56 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। यह डील भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति में एक बड़ा कदम साबित हुई।
गाज़ा पीस डील
2025 के अंतिम महीनों में दुनिया ने मध्य-पूर्व में एक उम्मीद की किरण देखी। 9 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच एक गाज़ा शांति समझौता करवाया। हालांकि यह युद्धविराम बेहद नाजुक है, लेकिन दिसंबर में यह लागू हो गया। इस समझौते में गाज़ा के पुनर्निर्माण, वहां रहने वाले लोगों को राहत पहुंचाने और बंधकों की रिहाई पर जोर दिया गया है। ट्रंप ने इस दौरान 20 सूत्रीय योजना भी पेश की, जिसमें सबसे खास है। एक अंतरराष्ट्रीय सेना का गठन, जो गाज़ा की सुरक्षा संभालेगी। पाकिस्तान समेत कई देशों ने इस अंतरराष्ट्रीय सेना में अपने सैनिक भेजने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इजरायल अभी तक इस विचार पर स्पष्ट रूप से सहमत नहीं हुआ है। इसके साथ ही हमास को भविष्य में हथियार-विहीन करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
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