मोनोपोली का खामियाजा: ‘एयरलाइन प्रबंधन की मनमानी’ पर सवाल, 60% बाज़ार हिस्सेदारी वाली इंडिगो की लापरवाही पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर पर भारी
एयरपोर्ट पर अब भी ‘अफरातफरी’ का माहौल: इंडिगो फ्लाइट रद्द होने से हज़ारों यात्री फंसे, सोशल मीडिया पर हंगामा करते लोगों के वीडियो वायरल
इंडिगो का संकट सुधरता नजर नहीं आ रहा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी के ऑपरेशन में आज भी सुधार नहीं दिख रहा है। पिछले चार दिनों में लगभग 2000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। चारों तरफ अफरातफरी का माहौल है। सोशल मीडिया पर नाराज और गुस्से में एयरपोर्ट पर हंगामा करते यात्रियों की तस्वीरें और वीडियो वायरल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका
इंडिगो दावा कर रहा है कि स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा और 15 दिसंबर से फ्लाइट की आवाजाही सामान्य हो सकेगी। इसी बीच सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि एविएशन से संबंधित सुधार एक नवंबर से ही लागू हैं और किसी अन्य एयरलाइन को इससे कुछ खास समस्या नहीं हुई। अब घटना पर गृहमंत्री अमित शाह भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री से बातचीत कर हालात का जायजा लिया है। डीजीसीए ने भी संकट से निपटने के लिए पायलट एसोसिएशन को इस मामले में पत्र लिखा है।
इससे साफ जाहिर होता है कि इंडिगो प्रबंधन ने समय रहते एक्शन नहीं लिया। उनकी लापरवाही से आज लाखों लोग एयरपोर्ट पर परेशान हो रहे हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिका दायर कर इंडिगो के मामले में दखल देने की मांग की गई है।नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस मामले में इंडिगो को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि वह व्यापारियों के खिलाफ नहीं हैं लेकिन व्यापार में एकाधिकार के खिलाफ हैं।
फ्लाइट कैंसिलेशन से शव तक एयरपोर्ट पर अटका
सोशल मीडिया पर हैरान-परेशान लोगों की एयरपोर्ट पर लगी कतार साफ दिख रही है। स्थिति भयावह हो गई है। एयरपोर्ट पर चारों ओर अफरातफरी है। सोशल मीडिया पर ऐसे भी वीडियो वायरल हैं जिनमें एक नवविवाहित जोड़े को अपने रिसेप्शन के लिए जाना था, लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन की वजह से वे नहीं जा पाए और रिसेप्शन के कार्यक्रम में ऑनलाइन ही शामिल होना पड़ा।एक शख्स एयरपोर्ट रिसेप्शन पर चिल्लाता हुआ नजर आ रहा है कि ‘मेरी बेटी को ब्लीडिंग हो रही है, उसके पीरियड्स आ चुके हैं’।
इसके अलावा एक अत्यंत मार्मिक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक महिला अपने पति के शव को शिलांग ले जाने की बात कर रही है और फ्लाइट कैंसिलेशन की वजह से उनका शव वहीं रखा हुआ है। शव को कॉफिन में रखने की एक सीमित अवधि होती है । यह अत्यंत ही भावुक और निराश कर देने वाला वीडियो है।
इंडिगो का क्राइसिस मैनेजमेंट खराब
सिविल एविएशन मंत्रालय साफ तौर पर इसे इंडिगो के मिसमैनेजमेंट के तौर पर देख रहा है। मंत्रालय का मानना है कि इंडिगो का क्राइसिस मैनेजमेंट बिल्कुल ठीक नहीं है। मंत्रालय ने इंडिगो को एफडीटीएल के नियमों में पहले ही छूट दे दी है, साथ ही नाइट ड्यूटी और रेस्ट अवर के नियमों से भी एयरलाइन को कुछ वक्त के लिए राहत दी गई है। इसके अलावा सरकार ने एक इंक्वायरी कमिटी का भी गठन किया है।
इंडिगो की मोनोपली पड़ रही भारी
कुछ साल पहले भारत में कई एयरलाइन कंपनियां ऑपरेट करती थीं। प्रतिस्पर्धा का असर टिकट से लेकर एयरलाइन सुविधाओं तक में दिखता था — जेट एयरवेज, किंगफिशर, डेक्कन, इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया इन सभी में एक हेल्दी कंपटीशन था। लेकिन इंडिगो ने अपनी सस्ती और व्यवस्थित समयबद्ध हवाई योजनाओं से अपनी साख मजबूत की।
लेकिन आज एयरलाइन उद्योग में इंडिगो का लगभग 60 से 65 फ़ीसदी हिस्सा है। यह एकाधिकार कई मायनों में घातक साबित हो रहा है। एक एयरलाइन पर अत्यधिक भरोसा और निर्भरता भारत के लिए मुश्किल साबित हो सकती है। एयरलाइन प्रबंधन की मनमानी पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर पर भारी पड़ रही है।
