चक्रवाती तूफान ‘दित्वाह’ की तबाही! श्रीलंका-इंडोनेशिया-थाईलैंड में 900 से अधिक जानें गईं
दक्षिण एशिया में दित्वाह का कहर: 900 से अधिक मौतें
चक्रवाती तूफान दित्वाह लगातार मुसीबत बना हुआ है। श्रीलंका, इंडोनेशिया और थाईलैंड में इस तूफान ने भीषण तबाही मचाई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ सामने आई हैं। तीनों देशों में अब तक 900 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। राहत दलों का कहना है कि जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। कई लोग अब भी लापता हैं। करीब 48,000 से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं और अस्थायी राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।

श्रीलंका की स्थिति सबसे विकराल
श्रीलंका में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं, जहाँ बाढ़ और भूस्खलन से 334 मौतों की पुष्टि हुई है। राजधानी कोलंबो के निचले इलाकों में पानी भर गया है और कई कस्बे पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानायके ने आपातकाल की घोषणा करते हुए कहा कि देश दो दशकों की सबसे बड़ी आपदा से जूझ रहा है। लगभग 1,48,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत कर्मी कीचड़ और गिरे पेड़ों से भरी सड़कों को साफ कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।

इंडोनेशिया में 400 से ज्यादा मौतें
इंडोनेशिया में भी हालात बेकाबू हैं। देश में अब तक 442 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 402 लोग लापता हैं। सुमात्रा द्वीप के कई इलाके अभी भी संपर्क से कटे हुए हैं, जहाँ राहत सामग्री पहुँचाना बेहद मुश्किल हो रहा है। कई क्षेत्रों में लोग खाने-पीने की कमी से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें लोग बाढ़ में डूबे बाजारों में जरूरी सामान लेने के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। राहत कार्य तेज़ करने के लिए दो युद्धपोत तैनात किए गए हैं।

थाईलैंड में भी हालात गंभीर
थाईलैंड में एक दशक की सबसे भीषण बाढ़ में 162 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार राहत कार्यों में जुटी है और मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जा रहा है। हालांकि धीमी राहत प्रक्रिया को लेकर जनता में नाराज़गी बढ़ी है, जिसके चलते दो स्थानीय अधिकारियों को निलंबित किया गया है। मॉनसून की भारी बारिश के साथ आए उष्णकटिबंधीय तूफान ने स्थिति और बिगाड़ दी है, जिससे कई इलाकों में बड़ा विनाश हुआ है।