अब आसमान पर भारत की पकड़ और मजबूत, दिखा प्राइवेट रॉकेट!
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्काईरूट एयरोस्पेस के इनफिनिटी कैंपस का भी हुआ उद्घाटन, 2026 में अंतरिक्ष में जाएगी उड़ान।

भारत ने स्पेस सेक्टर में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I को देश और दुनिया के सामने पेश किया है । यह रॉकेट अपने आप में खास इसलिए है, क्योंकि इसे किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं, बल्कि निजी भारतीय कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है। इसकी ऊंचाई लगभग इतनी है कि इसे 7 मंजिला इमारत के बराबर माना जा रहा है। यह रॉकेट 2026 में लॉन्च किया जाएगा और यह करीब 300 किलोग्राम वजन वाला सैटेलाइट अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता रखता है।
स्काईरूट का नया इनफिनिटी कैंपस हुआ उद्घाटित
रॉकेट के अनावरण के साथ ही प्रधानमंत्री ने कंपनी के नए इनफिनिटी कैंपस का भी उद्घाटन किया। यह कैंपस हैदराबाद में बना है, जहां रॉकेट के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग से जुड़े बड़े स्तर के काम होंगे। कंपनी का मुख्य कार्यालय भी यही स्थित है।
कौन हैं स्काईरूट के संस्थापक?
इस कंपनी की शुरुआत 2018 में पवन चंदना और भरत ढाका ने की थी। दोनों IIT के पूर्व छात्र हैं और इसरो में वैज्ञानिक के रूप में काम कर चुके हैं। आज इन्हें भारत का “इलॉन मस्क” कहा जा रहा है, क्योंकि जिस तरह अमेरिका में स्पेस एक्स ने निजी क्षेत्र में रॉकेट लॉन्चिंग का रास्ता खोला, उसी तरह भारत में यह कंपनी निजी स्पेस मिशन का नेतृत्व कर रही है।
रॉकेट विक्रम-I क्यों खास है?
स्काईरूट ने इससे पहले 2022 में विक्रम-S लॉन्च किया था, लेकिन वह सब-ऑर्बिटल मिशन था यानी वह 100 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया था। लेकिन पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश नहीं कर सका था। इसके मुकाबले विक्रम-I को पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने के लिए डिजाइन किया गया है। यही वजह है, कि इसे भारत के निजी स्पेस मिशन की असली शुरुआत माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
इस मौके पर प्रधानमंत्री काफी उत्साहित दिखे और उन्होंने अपने भाषण में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “आज का दिन भारत के स्पेस इतिहास में बड़ा पड़ाव है। उन्होंने इसे युवा शक्ति, नवाचार और नई सोच का प्रतीक बताया।”
पीएम ने कहा कि “भारत अब सिर्फ सरकारी एजेंसियों के भरोसे अंतरिक्ष में उड़ान नहीं भर रहा, बल्कि अब नई पीढ़ी के इंजीनियर, डिज़ाइनर और वैज्ञानिक देश को आगे बढ़ाने की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने स्काईरूट के संस्थापकों की तारीफ करते हुए कहा कि “उन्होंने न केवल विश्वास और मेहनत दिखाई, बल्कि जोखिम उठाकर नई दिशा दी।”

भारत का स्पेस सेक्टर अब बदल रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि “भारत की अंतरिक्ष यात्रा बहुत कम संसाधनों से शुरू हुई थी और आज हम एक नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्पेस सेक्टर में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके बाद निजी कंपनियों को इसमें प्रवेश का मौका मिला। नई स्पेस पॉलिसी के तहत भारत में startups के लिए बड़े अवसर बने हैं।” उन्होंने बताया कि ” आज देश में 300 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। कई स्टार्टअप महज दो-चार लोगों से, किराए के ऑफिस से शुरू हुए थे, लेकिन अब वे ग्लोबल स्तर पर पहचान बना रहे हैं।”
नई पीढ़ी का आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि “आज का भारतीय युवा अपने सपने पूरे करने के लिए पीछे नहीं हटता। वह न सिर्फ नवाचार को समझता है, बल्कि जोखिम उठाने की क्षमता भी रखता है। उन्होंने कहा कि “भारत आज उस मुकाम पर पहुंच रहा है, जहां आने वाले समय में देश रॉकेट लॉन्चिंग और स्पेस मिशन में एक बड़ी ताकत के रूप में सामने आएगा।”
भारत बन रहा है स्पेस हब
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा, कि आज भारत का स्पेस सेक्टर दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। कई प्राइवेट कंपनियां अब सैटेलाइट सर्विस, स्पेस टेक्नोलॉजी और कमर्शियल लॉन्चिंग की दिशा में काम कर रही हैं। इससे भारत न सिर्फ तकनीकी रूप से मजबूत हो रहा है बल्कि वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी बना रहा है।
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