पासपोर्ट विवाद पर चीन ने अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ प्रांत बताया! भारत बोला ‘मूर्खतापूर्ण’ हरकत
चीन का नया दावा, भारत का करारा जवाब: अरुणाचल को लेकर फिर बढ़ा तनाव
चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को अपना इलाका बताया है। मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जांगनान (अरुणाचल) “चीन का हिस्सा” है और भारत ने इस प्रदेश पर “अवैध कब्जा” कर रखा है। चीन का यह दावा उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें भारतीय महिला पेम वांगजॉम थांगडॉक के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर हुई कथित बदसलूकी का मामला उठाया गया था।
भारत ने किया दावा खारिज
भारत ने चीन के इस दावे को सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का “अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा” है। उन्होंने कहा कि चीन चाहे जितना भी इनकार करे, इससे सच्चाई नहीं बदल सकती। भारत ने पेम की हिरासत और पासपोर्ट विवाद का मुद्दा चीन से भी उठाया है।
अरुणाचल लिखे होने पर किया गया विवाद
ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय महिला पेम ने आरोप लगाया कि चीनी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को इसलिए अवैध बताया, क्योंकि उसमें जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखा था। वह लंदन से जापान जा रही थीं और शंघाई में 3 घंटे का ट्रांजिट था, लेकिन उन्हें 18 घंटे तक रोके रखा गया। पेम के अनुसार न उन्हें सही जानकारी दी गई, न खाना मिला और न ही एयरपोर्ट की सुविधाएं इस्तेमाल करने दी गईं।
पेम ने दावा किया कि उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और कई अधिकारियों ने उनका मजाक उड़ाया। उन्हें बार-बार कहा गया कि वे चीनी पासपोर्ट के लिए आवेदन करें। बाद में भारतीय दूतावास की मदद से ही वह शंघाई से बाहर निकल सकीं। उन्होंने मांग की है कि भारत इस मुद्दे को चीन के साथ मजबूती से उठाए और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
लंबे वक्त से चीन दावा करता रहा है
अरुणाचल प्रदेश पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है। वह इसे ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है और भारत पर आरोप लगाता है कि उसने इस क्षेत्र पर कब्जा किया है। 2015 में चीन के एक शोधकर्ता ने भी दावा किया था कि जांगनान (चीन का अरुणाचल के लिए नाम) के पुराने नाम बदलना उनका अधिकार है।
चीन इस क्षेत्र पर दावा जताने के लिए लगातार यहां की जगहों के नाम बदलता रहा है। मई 2024 में चीन ने अरुणाचल की 27 जगहों के नाम भी बदल दिए। बीते 8 सालों में वह 90 से ज्यादा जगहों के नाम बदल चुका है। भारत ने इस हरकत को “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए कहा था कि नाम बदलने से जमीन की हकीकत नहीं बदलती।

अरुणाचल पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा और रणनीतिक राज्य है, जिसकी सीमाएं तिब्बत, भूटान और म्यांमार से मिलती हैं। चीन की सबसे ज्यादा रुचि तवांग क्षेत्र में है, जो तिब्बत और भूटान के पास स्थित है। चीन इस क्षेत्र पर दबाव बनाने के लिए अक्सर नए दावे और नई सूचियां जारी करता है।
चीन का नाम बदलने का सिलसिला नया नहीं है। 2017, 2021, 2023 और 2024 में भी वह कई स्थानों के नाम बदल चुका है। भारत का कहना है कि चीन चाहे जितनी लिस्ट जारी कर ले, अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट हिस्सा है और रहेगा। भारत ने दोहराया है कि न चीन का दावा वैध है, न उसकी कहानी में कोई सच्चाई।
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