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किसान संगठन फिर सड़कों पर, पंजाब-हरियाणा से भारी जमावड़े के बीच ये है किसानों की प्रमुख मांगे ?

किसान संगठन

राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा ज्ञापन, MSP, कर्जमाफी और बिजली बिल वापसी जैसी मांगें शामिल।

किसानों ने कहा, “कानून लौटे पर हालात नहीं बदले, खेती की लागत बढ़ी और आय वही।”

देश में एक बार फिर किसान आंदोलन को आवाज़ तेज हो गई है। केंद्र सरकार के खिलाफ पहले बड़े आंदोलन को आज पांच साल पूरे हो गए हैं, और इसी मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने बुधवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान अपनी पुरानी मांगों को लेकर फिर सड़क पर उतर रहे हैं।

MSP कानून की मांग

किसान संगठनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन तैयार किया है। इस ज्ञापन में सबसे बड़ी मांग है स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर MSP को कानूनी गारंटी मिले। किसान कहते हैं कि कृषि कानून वापस लेने के बाद सरकार ने लिखित रूप में आश्वासन दिया था कि MSP को लेकर कानून बनाया जाएगा, लेकिन आज तक वह वादा पूरा नहीं हुआ।

किसानों की क्या – क्या मांगे हैं

  1. किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पूरी तरह कर्ज माफी।
  2.  बिजली विधेयक 2025 वापस लिया जाए।
  3. चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को रद्द किया जाए।
  4. मनरेगा में मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिदिन की जाए और काम के दिन बढ़ाकर 200 दिन किए जाएं।
  5. खाद में दी जा रही सब्सिडी को फिर से बहाल किया जाए।
  6. यूरिया और DAP जैसे उर्वरकों की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित की जाए।
  7. बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।

किसानों का कहना है, कि पिछले कई सालों में खेती की लागत बहुत बढ़ गई है। लेकिन किसान को मिलने वाली कीमत वही की वही है।

क्यों दोबारा प्रदर्शन कर रहे किसान?

किसानों की ओर से कहा गया है, कि सरकार ने कई दावे और वादे किए, लेकिन ज़मीनी बदलाव बहुत कम हुए हैं। ज्ञापन में यह भी लिखा गया है कि किसानों ने आंदोलन के दौरान 380 दिनों तक दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाला था, जिसमें 736 किसानों की मौत भी हुई थी। किसान संगठनों का दावा है, कि आंदोलन खत्म होने के बाद आश्वासन दिए गए। लेकिन अब सरकार ऐसी नीतियां ला रही है। जो किसानों और खेती के खिलाफ जा रही हैं। उनका कहना है कि, “किसान पांच साल से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने ऐसे कदम उठाए हैं जिससे खेती और कठिन हो गई है।”

किसान आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी

ज्ञापन में दावा किया गया है कि पिछले 11 वर्षों में किसानों की आत्महत्या के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। किसान संगठनों का आरोप है कि खेती अब घाटे का सौदा बन चुकी है और किसान अपनी जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहे।

किसानों की नाराज़गी

2017 में सरकार ने कहा था, कि “2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। लेकिन किसानों कहना हैं कि सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा। खेती की लागत दोगुनी हो गई है जीवनयापन की लागत तीन गुनी हो गई है। लेकिन किसान की आमदनी नहीं बढ़ी।अमेरिका के टैरिफ पर भी आपत्ति दर्ज की गई है।  किसान संगठनों ने अमेरिका द्वारा भारत पर काफी अधिक शुल्क लगाने का मुद्दा भी उठाया है। SKM का कहना है कि “यह भारत की संप्रभुता पर हमला है और सरकार को इसका जवाब कड़े कदमों से देना चाहिए।” प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन अलर्ट मोड में है। पुलिस ने पहले ही ट्रैफिक सलाह जारी कर दी है। कई रास्तों को आज बंद रखा जा सकता है क्योंकि पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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