दिल्ली में प्रदूषण विरोध प्रदर्शन की आड़ में ‘नक्सल समर्थन! हिड़मा के लिए नारेबाजी, पुलिस पर छिड़का स्प्रे
प्रदूषण बहाना, नक्सल निशाना? राजधानी में हिड़मा पोस्टर पर गरमाई सियासत
दिल्ली-एनसीआर में खराब होती हवा की गुणवत्ता को लेकर रविवार को इंडिया गेट पर युवाओं ने प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि सरकार प्रदूषण पर सतही नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शन के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने कुख्यात नक्सली माड़वी हिड़मा के समर्थन में नारे लगाए। उसके पोस्टर भी दिखे। नारेबाजी में कन्हैया जैसे वामपंथी नेताओं का नाम भी सुनाई दिया।

इस प्रदर्शन में दिल्ली समन्वय समिति के सदस्य और कई छात्र संगठन शामिल थे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कुछ ही देर में तनाव में बदल गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और एम्बुलेंस व मेडिकल स्टाफ का रास्ता ब्लॉक कर दिया। पुलिस के हटाने पर प्रदर्शनकारियों ने मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल किया, जिसमें 3 से 4 पुलिसकर्मी घायल हुए। दो थानों में एफआईआर दर्ज की गई है और 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सख्त कार्रवाई करेगी पुलिस
दिल्ली पुलिस के DCP देवेश महला ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, सड़क जाम और मिर्ची स्प्रे के इस्तेमाल पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। हिड़मा के पोस्टरों और नारेबाजी की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि “इस पूरे मामले में किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।”

भाजपा ने कहा—अर्बन नक्सल
भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि “यह प्रदूषण नहीं, बल्कि हिड़मा एनकाउंटर पर सरकार को घेरने की कोशिश थी। ऐसे ‘अर्बन नक्सल’ के खिलाफ एक्शन होना चाहिए।” वहीं, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल युवा “समझ नहीं पा रहे कि डेमोक्रेसी कैसे काम करती है, उन्हें सीखने की जरूरत है।”
वहीं आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने बढ़ते प्रदूषण पर केंद्र की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और आपातकालीन मीटिंग की मांग की। उन्होंने कहा कि “यह नेशनल हेल्थ इमरजेंसी है, लेकिन दोनों सरकारें प्रभावी कदम नहीं उठा रहीं।”
1 करोड़ का इनाम था हिड़मा पर
सुकमा का रहने वाला माड़वी हिड़मा 16 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ गया था। दो दशक में उसने कई बड़े हमलों की साजिश रची। उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। दंतेवाड़ा (2010), झीरम घाटी (2013), सुकमा (2017) और 2021 की मुठभेड़ में कई दर्जन जवानों की शहादत के लिए हिड़मा को जिम्मेदार माना जाता है। वह दंडकारण्य के जंगलों के रास्तों और भूगोल का गहरा जानकार था।

18 नवंबर 2025 की सुबह, आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली इलाके में मुठभेड़ के दौरान हिड़मा समेत 6 नक्सली ढेर हुए। मौके से हथियारों का बड़ा जखीरा मिला। इस मुठभेड़ में उसकी पत्नी मदगाम राजे भी मारी गई। 30 नवंबर की तय डेडलाइन से पहले हिड़मा का मारा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना गया।
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