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भारत की दिव्यांग बेटियों का करिश्मा! T20 World Cup जीत फहराया परचम…

भारत की दिव्यांग बेटियों का करिश्मा! T20 World Cup जीत फहराया परचम…

 

भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए रविवार दोहरी खुशी लेकर आया। महिला क्रिकेट बुलंदी के सितारे पर है। भारतीय महिला टीम की स्टार क्रिकेटर स्मृति मंधाना की शादी की खबरें सोशल मीडिया पर छाई रहीं, वहीं दूसरी ओर भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट से हराकर पहला महिला ब्लाइंड T20 विश्व कप जीत लिया है।

 

आसानी से जीत दर्ज की भारतीय टीम ने

श्रीलंका के कोलंबो स्थित पी. सारा ओवल में खेले गए उद्घाटन ब्लाइंड महिला T20 वर्ल्ड कप का खिताब भारत ने अपने नाम कर लिया। फाइनल में पहले गेंदबाज़ी करते हुए भारत ने नेपाल को 5 विकेट पर 114 रन पर रोक दिया। आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने मात्र 12 ओवर में 3 विकेट पर 117 रन बनाकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। रन चेज़ की हीरो रहीं फूला सरेन, जिन्होंने नाबाद 44 रन की बेहतरीन पारी खेली। भारत का दबदबा इतना रहा कि नेपाल अपनी पूरी पारी में सिर्फ एक बाउंड्री ही लगा सका।

इससे पहले सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जबकि नेपाल ने पाकिस्तान को मात देकर फाइनल में जगह बनाई।

छह टीमों के इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान की मेहरीन अली सबसे अधिक चमकीं और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 600 से ज्यादा रन बनाए। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने 78 गेंदों में 230 रन की अविश्वसनीय पारी खेली थी और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी 133 रन जोड़े। वहीं को-होस्ट श्रीलंका अपने शुरुआती पाँच मैचों में से सिर्फ एक मैच, USA के खिलाफ, जीत सका। भारत की ऐतिहासिक जीत ने महिला ब्लाइंड क्रिकेट में नए युग की शुरुआत कर दी है।

 

विशेष नियमों के तहत होता है ब्लाइंड क्रिकेट

ब्लाइंड क्रिकेट एक विशेष प्रकार का आयोजन है, जिसमें दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं। इसमें सफेद प्लास्टिक की गेंद का उपयोग होता है, जिसके अंदर बॉल बेयरिंग भरे होते हैं। गेंद के लुढ़कते ही उससे खड़खड़ाहट की आवाज आती है, जिससे बल्लेबाज और फील्डर उसकी दिशा का अंदाजा लगा पाते हैं। गेंदबाज बल्लेबाज से पहले पूछता है कि क्या वह तैयार है, और फिर गेंद फेंकते समय ज़ोर से “प्ले” कहता है। गेंद अंडरआर्म और कम से कम एक बार उछालकर फेंकी जाती है।

नियमित क्रिकेट की तरह इसमें भी हर टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन कम से कम चार खिलाड़ी पूरी तरह नेत्रहीन होना अनिवार्य है। सभी खिलाड़ियों को निष्पक्षता के लिए आंखों पर पट्टी बांधनी पड़ती है। फील्डर अपनी जगह बताने के लिए ताली बजाते हैं, जबकि आंशिक रूप से दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के आधार पर B1, B2 और B3 श्रेणियों में बांटा जाता है। हर टीम में अधिकतम आठ B1 खिलाड़ी हो सकते हैं, और खास बात यह है कि B1 खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए हर रन को दोगुना गिना जाता है।

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Shashwat Srijan

Content Writer

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