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अब क्या करेगी मोदी सरकार ! मोहम्मद यूनूस की भारत को चिट्ठी, शेख हसीना को वापस भेजे

शेख हसीना

शेख हसीना को वापस ढाका भेजने की मांग तेज, मानवता के खिलाफ अपराध में सुनाई गई है मौत की सज़ा

शेख हसीना की मुसीबतें बढ़ती जा रही है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक औपचारिक पत्र भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस ढाका भेजने की मांग की है। यह पत्र उन्हें उस समय भेजा गया है, जब कुछ दिन पहले ही वहां की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई है। यह पूरा मामला अब दोनों देशों के बीच एक गंभीर राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन गया है।

बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन के अनुसार , यह पत्र भारत को 21 नवंबर को भेजा गया। इस पर भारत की तरफ़ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं, जब ढाका में भारी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण उनकी सरकार गिर गई थी। उसके बाद से बांग्लादेश बार-बार भारत से उन्हें वापस भेजने का अनुरोध करता रहा है।

ट्रिब्यूनल ने क्यों सुनाई मौत की सज़ा?

ढाका की विशेष अदालत ने हसीना और उनके सरकार के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को उन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया, जो जुलाई–अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थीं। अदालत के अनुसार, उस समय प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई कराई गई, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा फैली और लगभग 1400 लोगों की मौत हुई। अदालत ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” मानते हुए दोनों को दोषी ठहराया और मौत की सज़ा सुना दी।

सबसे अहम बात यह है, कि यह मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला। दोनों पहले ही भारत आ चुके थे, इसलिए कोर्ट ने उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई पूरी की और फैसला सुना दिया। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि फैसले के बाद उन्हें वापस लाना “कानूनी ज़रूरत” है।

बांग्लादेश की मांग

ढाका का तर्क है, कि भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इस समझौते के तहत दोनों देश गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए लोगों को एक-दूसरे को सौंप सकते हैं। बांग्लादेश का कहना है कि इस संधि के अनुसार भारत को हसीना को ढाका भेज देना चाहिए, ताकि सज़ा पूरी की जा सके।ढाका यह भी कह रहा है कि “इतने बड़े आरोपों में दोषी ठहराई गईं हसीना भारत में रहकर न्यायिक प्रक्रिया से बच नहीं सकतीं। उनका दावा है कि उन्हें अपने देश के कानून का सामना करना चाहिए।”

शेख हसीना

भारत की चुप्पी

भारत ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पिछले साल भी जब बांग्लादेश ने ऐसा ही पत्र भेजा था। तब भी भारत ने सिर्फ इतना कहा था। कि ” उन्होंने मामले को “नोट” कर लिया है।”

भारत की चुप्पी की वजह समझने पर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह सिर्फ कानून का मामला नहीं है। शेख हसीना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरा रही हैं। उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध बने थे। चाहे वह सुरक्षा सहयोग हो, व्यापार हो या सीमा से जुड़े मुद्दे। ऐसे में भारत का कोई भी कदम दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकता है।

क्या है प्रत्यर्पण?

साधारण भाषा में समझें तो प्रत्यर्पण एक ऐसा तरीका है, जिसमें एक देश दूसरे देश से अपने यहां के आरोपी या दोषी व्यक्ति को वापस मांग सकता है। लेकिन किसी आरोपी को दूसरे देश से वापस लाना इतना आसान नहीं होता।

  • दोनों देशों के बीच समझौता होना ज़रूरी है।
  • जिसे वापस भेजना है, उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर होने चाहिए।
  • उस व्यक्ति को भेजने से पहले जिस देश में वह अभी है, वहाँ की सरकार और अदालत, दोनों की मंजूरी चाहिए।
  • यानी फैसला सिर्फ कागज़ के एक पत्र से नहीं होता। इसके पीछे कई कानूनी और राजनीतिक प्रक्रियाएँ चलती हैं।

शेख हसीना भारत क्यों आई थीं?

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े स्तर पर हिंसा, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हंगामा हुआ। हालात, इतने बिगड़ गए कि हसीना की सरकार गिर गई। उस दौरान उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हुआ और वे ढाका छोड़कर भारत आ गईं। तब से वे लगभग 15 महीनों से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का कहना है कि “इतने लंबे समय से भारत में रहना न्याय प्रक्रिया के रास्ते में रुकावट है।”

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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