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बिहार में “वोटों की चोरी” के दावों की ये है सच्चाई! क्या सच में 3 लाख फर्जी वोट जोड़े गए हैं?

बिहार में “वोटों की चोरी” के दावों की ये है सच्चाई! क्या सच में 3 लाख फर्जी वोट जोड़े गए हैं?

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ा दावा तेजी से फैल रहा है कि राज्य में “वोटों की चोरी” हुई है। दो अलग-अलग प्रेस रिलीज़ दिखाकर और तुलना कर कुछ यूजर्स आरोप लगा रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में कुल मतदाताओं से भी अधिक लोगों ने मतदान किया। लेकिन क्या यह सच है?

निर्वाचन आयोग की प्रेस रिलीज़ से शुरू हुआ विवाद

पहला विवाद 30 सितंबर को जारी निर्वाचन आयोग की प्रेस रिलीज़ से पैदा हुआ, जिसमें बताया गया कि SIR के बाद बिहार में कुल 7 करोड़ 42 लाख मतदाता दर्ज हैं। इसके बाद दूसरे चरण के मतदान के बाद आयोग ने 11 नवंबर को एक दूसरी प्रेस रिलीज़ जारी की।

सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि नई रिलीज़ में लगभग 7 करोड़ 45 लाख लोगों ने मतदान किया, जबकि कुल मतदाता तो 7.42 करोड़ ही थे।

जांच में क्या निकला?

जांच में सामने आया कि यह दावा पूरी तरह गलत है।

11 नवंबर की प्रेस रिलीज़ में जहाँ 66.91% मतदान का उल्लेख है, वहीं “Poll Participation” सेक्शन में ब्रैकेट में सिर्फ प्रतिशत (%) लिखा है — न कि मतदाताओं की संख्या।

इसके ठीक नीचे लिखा है — Electors: 7,45,26,858
इसका मतलब यह संख्या कुल मतदाताओं की है, न कि मतदान करने वाले लोगों की।

यानी भ्रम इसलिए फैला कि सोशल मीडिया पोस्ट में “7.45 करोड़” को मतदान करने वालों की संख्या समझ लिया गया, जबकि यह वास्तव में कुल मतदाताओं की संख्या है।

मतदान करने वालों की वास्तविक संख्या 7.45 करोड़ नहीं, बल्कि उन्हीं में से 66.91% है।

बिहार वोटों की चोरी का सच

3 लाख वोट चोरी के दावों में क्या है सच्चाई?

SIR में मतदाता संख्या 7.42 करोड़ थी, लेकिन चुनाव तक यह बढ़कर 7.45 करोड़ हो गई।
क्या यह “फर्जी वोट” हैं?

चुनाव आयोग के अनुसार —
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि:

  • नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से 10 दिन पहले तक
  • कोई भी नागरिक मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आवेदन कर सकता है

SIR के बाद भी हजारों आवेदन आए और लगभग 3 लाख नए मतदाता जोड़े गए।

यही कारण है कि मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ से बढ़कर 7.45 करोड़ हुई। यह एक पूरी तरह सामान्य और कानूनी प्रक्रिया थी।

निष्कर्ष: “वोट चोरी” का दावा झूठा

  • मतदाता सूची बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है
  • 3 लाख नए वोटर नियमों के तहत जोड़े गए
  • 7.45 करोड़ संख्या मतदान करने वालों की नहीं, कुल मतदाताओं की है
  • सोशल मीडिया पर फैल रही पोस्टें गलत व्याख्या पर आधारित हैं

इसलिए “3 लाख वोट चोरी” या “फर्जी वोटिंग” का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है।

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Shashwat Srijan

Content Writer

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