SC-ST में क्रीमी लेयर को लेकर CJI गवई का बड़ा बयान! इंद्रा साहनी केस का दिया हवाला
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की वकालत की है। उनका कहना है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो चुके परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। सीजेआई ने स्पष्ट कहा कि एक IAS अधिकारी का बच्चा और एक गरीब खेत मजदूर का बच्चा समान परिस्थितियों में नहीं आते, इसलिए SC आरक्षण में भी क्रीमी लेयर की पहचान जरूरी है।
इंद्रा साहनी केस का दिया हवाला
कार्यक्रम ‘India and the Living Indian Constitution at 75 Years’ में बोलते हुए सीजेआई गवई ने बताया कि जिस तरह इंद्रा साहनी केस (OBC आरक्षण) के बाद क्रीमी लेयर लागू हुई, उसी सिद्धांत को अनुसूचित जाति समुदाय पर भी लागू किया जा सकता है।
उन्होंने माना कि इस विचार की आलोचना होती रही है, लेकिन उनका कहना है कि यह समाज में समान अवसर और सामाजिक न्याय की दिशा में उठाया गया सही कदम है।
संविधान को समय के साथ विकसित होना चाहिए
सीजेआई गवई ने कहा कि भारतीय संविधान एक स्थिर या कठोर दस्तावेज नहीं है, बल्कि समय और जरूरतों के अनुसार बदलने वाला जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने भी समय-समय पर संशोधन की जरूरत को स्वीकार किया था।
उन्होंने बताया कि संविधान की दोनों तरफ से आलोचना होती है—कुछ इसे बहुत कठोर बताते हैं, तो कुछ इसे आसानी से बदला जा सकने वाला मानते हैं।
SC-ST समुदायों में भी क्रीमी लेयर का सुझाव

सीजेआई गवई ने कहा कि 2024 में उन्होंने सभी राज्यों को सुझाव दिया था कि SC-ST समुदायों के भीतर क्रीमी लेयर की पहचान की जाए और जो परिवार आर्थिक-सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें आरक्षण के लाभ से बाहर रखा जाए।
उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और उनके बढ़ते सशक्तिकरण की भी सराहना की।
“आज मैं जो हूँ, वह संविधान की वजह से हूँ”
अपने संबोधन में सीजेआई गवई भावुक हो गए और कहा कि अमरावती के एक साधारण नगर निगम स्कूल से पढ़कर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचना उनके लिए गर्व की बात है।
उन्होंने बताया कि संविधान ने ही देश को दो SC समुदायों से राष्ट्रपति और वर्तमान ST समुदाय की राष्ट्रपति दी — यह समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की मूल संवैधानिक भावना की ताकत को दर्शाता है।
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