मुखपत्र सामना में लिखा – “देश में अदालतें, लोकतंत्र और चुनाव एक तमाशा बन गए हैं।”

बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की शानदार जीत ने जहां बीजेपी और उसके नेताओं को उत्साह से भर दिया है, वहीं महाराष्ट्र में इसपर अलग तरह से प्रतिक्रिया आ रही है। शिवसेना उद्धव ठाकरे के मुखपत्र सामना ने इस जीत पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। संपादकीय में ना सिर्फ एनडीए और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान पर सवाल उठाए गए, बल्कि पूरे चुनाव सिस्टम, चुनाव आयोग और केंद्रीय नेतृत्व पर भी जमकर निशाना साधा गया है।
दरअसल, बिहार में जीत के बाद सीएम फडणवीस ने कहा था — “जो जीता वही सिकंदर।” इसी बात को पकड़कर सामना ने लिखा कि, “ये सिकंदर कौन है? क्या यह नए हिंदुत्ववादियों का नया बाप है?”
सिकंदर कौन?
सामना के संपादकीय में कहा गया कि “अगर आज बालासाहेब ठाकरे होते, तो इस ‘सिकंदर’ पर खुलकर तंज कसते।” लेख में लिखा गया कि महाराष्ट्र और देश के वास्तविक प्रेरणास्थल छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, और हिंदुत्व के लिए किसी “सिकंदर” की जरूरत नहीं है।
संपादकीय में लिखा था — “सिकंदर होगा तो BJP का बाप, लेकिन महाराष्ट्र का नहीं।”
“महाराष्ट्र के पिता शिवाजी महाराज हैं। बालासाहेब होते तो पूछते — ये नया सिकंदर कौन है?”
10 हजार रुपए पर उठा सवाल
सामना ने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर भी निशाना साधा। लिखा गया कि बिहार की महिलाओं को 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदे गए।
संपादकीय के अनुसार —
“मोदी-शाह ने बिहार में महिलाओं के वोट दस-दस हजार में खरीदे। महाराष्ट्र में ये वोट डेढ़ हजार में खरीदे गए।”
सामना ने कहा कि बालासाहेब के हिंदुत्व में न स्वार्थ था और न दिखावा। वर्तमान राजनीतिक हिंदुत्व को उन्होंने “ड्रामा” बताया।
लेख में तीखी टिप्पणी —
“देश में अदालतें, लोकतंत्र और चुनाव एक तमाशा बन गए हैं।”
सामना ने कहा कि आज चुनाव परिणाम जनता नहीं, चुनाव आयोग तय करता है। विपक्ष की आवाज संसद से लेकर सड़क तक दबाई जा रही है। बालासाहेब की निर्भीक आवाज आज याद आती है।
मराठी अस्मिता पर संपादकीय का फोकस
संपादकीय में लिखा गया —
“बालासाहेब ने मराठी मानुष को आत्मसम्मान से जीना सिखाया था। आज वही मराठी माणुस खुद को लूटा हुआ महसूस कर रहा है।”
सामना ने सवाल उठाया —
“मराठी माणुस, क्या तुम जाग रहे हो?”
संपादकीय में शिवसेना (उद्धव) ने वर्तमान सत्ता को
“लाचार अंधभक्तों की सरकार” बताया।

अमित शाह और सुरक्षा पर हमला
सामना ने लिखा कि गृहमंत्री अमित शाह कह रहे थे कि आतंकवाद खत्म हो गया,
“लेकिन उसी वक्त दिल्ली और श्रीनगर में धमाके हो गए।”
बिहार चुनाव और महाराष्ट्र की राजनीति
सामना का कहना है कि बिहार में एनडीए की जीत को भाजपा “हिंदुत्व की जीत” बता रही है, लेकिन यह बाला साहेब का हिंदुत्व नहीं है।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि —
“भाजपा जीत को हिंदुत्व की विजय बताकर सत्ता हासिल करना चाहती है, यह सिद्धांत नहीं, राजनीति है।”
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