दोनों चरणों में 66.9% मतदान के साथ बिहार ने रचा इतिहास; महिला वोटरों की बड़ी भागीदारी और नीतीश की योजनाओं ने फिर दिलाया बढ़त, तेजस्वी के वादे पड़े फीके – 14 नवंबर को आएगा असली फैसला।

बिहार में विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों का मतदान खत्म हो चुका है। अब सभी की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। लेकिन नतीजों से पहले ही विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी एग्जिट पोल्स ने राज्य की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है। लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल्स में एनडीए गठबंधन की सरकार बनने के अनुमान लगाए गए हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में कई संकेत छोड़ जाएंगे महिलाओं के वोटिंग पैटर्न से लेकर नीतीश कुमार के नेतृत्व तक। आइए विस्तार से समझते हैं।
अब तक की सबसे ज्यादा वोटिंग, क्या संकेत देती है, बंपर भागीदारी?
इस बार बिहार ने मतदान के मामले में इतिहास रच दिया। पहले चरण की 121 सीटों पर 65.08 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जबकि दूसरे चरण की 122 सीटों पर 68.79 प्रतिशत मतदान हुआ। दोनों चरणों को मिलाकर औसतन 66.9 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो 2020 के चुनाव के मुकाबले लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ी हुई वोटिंग यह बताती है, कि जनता में चुनाव को लेकर अभूतपूर्व उत्साह था। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब वोटिंग इतनी ज़्यादा होती है, तो इसका असर आमतौर पर सत्ता विरोधी लहर को कम कर देता है या किसी एक दल के पक्ष में मजबूत जनादेश का रूप लेता है।
महिला मतदाताओं की बम्पर वोटिंग
पिछले एक दशक में बिहार की राजनीति में महिलाएं ‘किंगमेकर’ साबित हुई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएँ चलाईं, शराबबंदी, साइकिल योजना, और हाल ही में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, जिसके तहत लाखों महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई।
एग्जिट पोल्स के रुझान बताते हैं कि महिलाओं ने एक बार फिर एनडीए और नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है। नीतीश का यह महिला वोट बैंक न सिर्फ़ स्थायी है, बल्कि हर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर एग्जिट पोल्स सही निकले, तो इसमें महिला वोटरों की बड़ी भूमिका होगी।
नीतीश कुमार के नेतृत्व पर फिर मुहर?
चुनाव के दौरान विपक्ष ने एनडीए में नीतीश कुमार की स्थिति पर लगातार सवाल उठाए। महागठबंधन की ओर से यह प्रचारित किया गया कि बीजेपी नीतीश को हटाने की तैयारी में है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा, एनडीए के शीर्ष नेताओं ने साफ़ कर दिया कि अगर सत्ता कायम रहती है, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहेंगे। अब अगर नतीजे भी एग्जिट पोल्स जैसे आते हैं, तो यह माना जाएगा कि जनता ने नीतीश के अनुभव और स्थिर नेतृत्व को फिर प्राथमिकता दी है। यह उस सवाल का भी जवाब होगा कि क्या बिहार अभी भी नीतीश कुमार के नाम पर वोट करता है, और जवाब “हाँ” होगा।
तेजस्वी यादव के वादे बनाम नीतीश की योजनाएँ
तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में वादों की झड़ी लगा दी थी। उन्होंने जीविका दीदियों की सैलरी 10,000 से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने, संविदा कर्मियों को स्थायी करने, और M–A–A (मकान, अन्न, आमदनी) योजना शुरू करने का वादा किया। लेकिन एग्जिट पोल्स के अनुसार जनता ने वादों से ज़्यादा भरोसा उस सरकार पर किया, जिसने पहले से कुछ करके दिखाया है।
नीतीश कुमार की योजनाएँ लोगों के जीवन में असर डाल चुकी हैं, खासकर महिला मतदाताओं पर। इसलिए एग्जिट पोल्स में एनडीए को बढ़त मिलना इस बात का संकेत है कि बिहार के मतदाताओं ने स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता दी है, न कि सिर्फ़ वादों को।
जनसुराज पार्टी – पहली परीक्षा में कमजोर प्रदर्शन
प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने 200 से ज़्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन कोई भी एग्जिट पोल उन्हें दो अंकों में सीटें नहीं दे रहा। यह साफ़ करता है कि जनसुराज इस चुनाव में बड़ा फैक्टर नहीं बन पाई। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सीटों पर इस पार्टी की मौजूदगी ने विपक्ष को नुकसान जरूर पहुँचाया है। वोट प्रतिशत और असर का असली आंकलन 14 नवंबर को नतीजों के दिन ही होगा।
शांतिपूर्ण मतदान
इस चुनाव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पहली बार बिहार में 100 प्रतिशत बूथों की लाइव वेबकास्टिंग की गई। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि इस बार 2616 उम्मीदवार मैदान में थे और चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी बिना किसी हिंसा के मतदान संपन्न हुआ।
साथ ही, चुनाव आयोग ने 127 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की और 220 से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई की। यह सब मिलकर बताता है कि बिहार का चुनाव इस बार न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अधिक रहा।
आंकड़ों में बदलाव की संभावना
हालाँकि फिलहाल वोटिंग प्रतिशत 66.9% बताया गया है, लेकिन निर्वाचन विभाग के मुताबिक़ कुछ हजार बूथों का डेटा अभी बाकी है। ऐसे में अंतिम आंकड़ा 67% से ऊपर भी जा सकता है। यह प्रतिशत बिहार के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक वोटिंग में से एक होगा।