“टैरिफ से अरबों डॉलर कमाने का दावा, हर अमेरिकी को 2000 डॉलर देने की बात पर ट्रम्प फिर सुर्खियों में”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर सुर्खियों में है । उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक नया दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को टैरिफ से अरबों डॉलर की कमाई हो रही है और इसी मुनाफे से देश के हर गैर-अमीर नागरिक को 2000 डॉलर (करीब 1.7 लाख रुपये) का “डिविडेंड” दिया जाएगा।
टैरिफ का विरोध करने वालों को दिया जवाब
ट्रम्प ने अपने पोस्ट में आलोचकों पर हमला करते हुए लिखा, “जो लोग टैरिफ का विरोध करते हैं, वे मूर्ख हैं। हमने अमेरिका को दुनिया का सबसे अमीर और सम्मानित देश बना दिया है, जहां महंगाई बहुत कम है और शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह डिविडेंड कब और किसे मिलेगा। उन्होंने पात्रता मानदंड या इस योजना की समयसीमा पर भी कुछ नहीं कहा। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने ऐसी घोषणा की है। अक्टूबर 2025 में भी उन्होंने 1000 से 2000 डॉलर की छूट का संकेत दिया था। ट्रम्प ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि टैरिफ नीतियों के कारण अमेरिकी कंपनियां अब फिर से देश में निवेश कर रही हैं। उनका कहना था कि टैरिफ ही वह दीवार है जिसने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बाहरी देशों पर निर्भर होने से बचाया है।
सुप्रीम कोर्ट पर साधा निशाना
उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “दूसरे देश हम पर टैरिफ लगाते हैं, लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो अदालतें और नेता सवाल उठाते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट नहीं समझता कि टैरिफ के बिना हमारे पास कुछ भी नहीं बचेगा? ट्रम्प का इशारा सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की ओर था, जिसमें उनके द्वारा लगाए गए कई टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट क्या बोला था
5 नवंबर 2025 को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि टैरिफ लगाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास नहीं बल्कि संसद (कांग्रेस) के पास है। कोर्ट की जज सोनिया सोतोमेयर ने कहा कि अमेरिकी संविधान टैक्स और टैरिफ जैसे फैसले विधायी शक्ति के अंतर्गत रखता है।
ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में चीन, कनाडा, मेक्सिको समेत कई देशों पर व्यापार घाटे के कारण भारी टैरिफ लगाए थे। उन्होंने इन कदमों को “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जोड़ते हुए कहा था कि व्यापार में असंतुलन देश के हितों के लिए खतरा है। इसके लिए उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला दिया था।
व्हाइट हाउस ने दी सफाई
व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय आपात स्थितियों में आर्थिक नियंत्रण का अधिकार है। सॉलिसिटर जनरल जॉन सावर ने चेतावनी दी कि अगर कोर्ट ने टैरिफ नीति को रद्द किया, तो अमेरिका को आर्थिक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ट्रम्प का तर्क है कि अप्रैल 2025 में लागू किए गए 10% से 50% तक के टैरिफ से अमेरिकी उद्योगों को फायदा हो रहा है। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस नीति से महंगाई बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध कमजोर हो सकते हैं।
ट्रेजरी विभाग ने कहा
ट्रम्प के बयान के बाद अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने ABC न्यूज को दिए इंटरव्यू में सफाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से इस डिविडेंड योजना पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उनका फोकस देश के 38 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज को कम करने पर है, न कि लोगों को सीधे चेक देने पर। उन्होंने बताया कि टैरिफ से हुई कमाई का एक हिस्सा टैक्स कटौती के रूप में लोगों को राहत देने में इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन सरकार का प्राथमिक लक्ष्य कर्ज भुगतान है।
ट्रम्प की योजना से कर्ज और बढ़ सकता है
रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में टैरिफ से केवल 195 अरब डॉलर की आय हुई है। यदि ट्रम्प की योजना के मुताबिक हर गैर-अमीर अमेरिकी को 2000 डॉलर दिए जाएं, तो इसका कुल खर्च लगभग 500 अरब डॉलर होगा। जो मौजूदा राजस्व से कहीं ज्यादा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह योजना “कर्ज घटाने की बजाय उसे और बढ़ा सकती है” क्योंकि अमेरिका पहले से ही 38 ट्रिलियन डॉलर (करीब 3,200 खरब रुपये) के कर्ज में डूबा हुआ है।
दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज उसके GDP के मुकाबले 120% से ज्यादा हो चुका है।कुल कर्ज का लगभग 70% हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास है, जबकि 30% विदेशी देशों और संस्थाओं के पास। जापान अमेरिका का सबसे बड़ा लेनदार है, जबकि चीन का हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में घटा है।
कर्ज पर ब्याज भुगतान ही अब अमेरिका को सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जो देश की आर्थिक नीतियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
भारत और रूस पर भी लगाए गए टैरिफ
ट्रम्प ने इस साल मार्च में संसद के जॉइंट सेशन में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि जो भी देश अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स लगाते हैं, उन सभी पर अब अमेरिका भी टैरिफ लगाएगा।
कुछ महीनों पहले उन्होंने भारत समेत 100 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगा दिया था । भारत पर लगाए गए 50% अमेरिकी टैरिफ में दो हिस्से हैं
- 25% रेसीप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ
- 25% रूस से तेल खरीदने पर पेनल्टी
ट्रम्प का दावा है कि भारत द्वारा रूस से खरीदे गए तेल से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिलता है, इसलिए यह कदम “आर्थिक दबाव” बनाने के लिए उठाया गया।
क्या है ये G2 युग ? जिसकी चर्चा राष्ट्रपति ट्रम्प कर रहे, भारत के लिए कैसे है ये खतरे की घंटी ?