आडवाणी को बधाई देने पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने शशि थरूर से बनाई दूरी!
पहले भी वंशवाद पर भी बोले थे थरूर! मोदी की तारीफ से असहज हुई थी, कांग्रेस।

दिल्ली कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बयान अक्सर काँग्रेस पार्टी को उलझन में डाल देते है। अब उन्होंने ऐसा ही एक बयान ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर दिया है। थरूर ने उन्हें 98वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हुए कुछ ऐसा कहा कि बधाई संदेश विवाद का कारण बन गया। कांग्रेस पार्टी ने थरूर की टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया और कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, पार्टी की नहीं।

कैसे शुरू हुआ विवाद
लालकृष्ण आडवाणी का 98वां जन्मदिन के अवसर पर भाजपा नेताओं के साथ कई विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी। इन्हीं में से एक थे कांग्रेस सांसद शशि थरूर। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आदरणीय श्री लालकृष्ण आडवाणी को उनके 98वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, उनकी विनम्रता और शालीनता और आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अमिट है।” थरूर के इस संदेश में आडवाणी की तारीफ की गई थी। लेकिन कांग्रेस के कई नेता इस पोस्ट से असहज हो गए। उन्हें लगा कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का आडवाणी की खुलकर प्रशंसा करना सही संदेश नहीं देता।
कांग्रेस का आधिकारिक बयान
बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस ने को स्पष्टीकरण जारी किया। पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “हमेशा की तरह डॉ. शशि थरूर अपनी बात कह रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके हालिया बयान से खुद को पूरी तरह अलग करती है।”
खेड़ा ने यह भी कहा कि “थरूर का कांग्रेस सांसद और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य के रूप में बने रहना कांग्रेस की “लोकतांत्रिक और उदारवादी सोच” को दिखाता है। इस बयान से साफ हो गया कि पार्टी ने थरूर के विचारों को व्यक्तिगत मानते हुए दूरी बना ली है।”

थरूर का बचाव
जब विवाद बढ़ा, तो शशि थरूर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता के लंबे सार्वजनिक जीवन को केवल एक घटना या विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। थरूर ने उदाहरण देते हुए कहा, “नेहरूजी के पूरे करियर को चीन युद्ध की हार से नहीं आंका जा सकता, और न ही इंदिरा गांधी के जीवन को सिर्फ आपातकाल से जोड़ा जा सकता है। उसी तरह, आडवाणी जी के लंबे सार्वजनिक जीवन को केवल एक घटना के आधार पर आंकना सही नहीं है।” थरूर के इस बयान का सीधा इशारा “राम जन्मभूमि आंदोलन” और “बाबरी मस्जिद विध्वंस” से था, जिसमें आडवाणी की भूमिका को लेकर अक्सर विवाद रहा है।
आलोचकों ने जताई नाराजगी
थरूर की इस टिप्पणी से कांग्रेस के कई नेताओं और समर्थकों में नाराजगी फैल गई। प्रसिद्ध वकील संजय हेगड़े ने एक्स पर लिखा, “माफ कीजिए श्रीमान थरूर, इस देश में ‘घृणा के बीज’ फैलाना जनसेवा नहीं है।” उनका इशारा 1990 के दशक की “रथ यात्रा” की ओर था, जिसे आडवाणी ने निकाला था और जिसने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी, लेकिन देश में साम्प्रदायिक तनाव भी बढ़ाया।
कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह मामला थोड़ा मुश्किल बन गया है । थरूर न सिर्फ पार्टी के सांसद हैं, बल्कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं। इसलिए पार्टी सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती थी। इसी वजह से कांग्रेस ने केवल यह कहा कि थरूर ने यह बयान व्यक्तिगत रूप से दिया है, और पार्टी इसका समर्थन नहीं करती।

आडवाणी और उनका राजनीतिक सफर
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वे भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उप-प्रधानमंत्री भी रहे। 2020 में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया था। आडवाणी को पिछले साल देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’भी दिया गया है।
वंशवाद पर भी उठाई आवाज
यह पहली बार नहीं है जब थरूर ने अपनी पार्टी से अलग राय रखी हो। हाल ही में उन्होंने ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट’ में एक लेख लिखा था। ‘भारतीय राजनीति एक पारिवारिक व्यवसाय है’। जिसमें उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि भारत को वंशवाद की जगह योग्यता और मेरिट को महत्व देना चाहिए।” थरूर ने लिखा था कि ” वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा है, क्योंकि इससे योग्य लोगों को अवसर नहीं मिलते। भाजपा ने इसे थरूर की “राहुल गांधी से निराशा” बताया और उन पर तंज कसा। कांग्रेस सांसद उदित राज ने थरूर के विचारों का जवाब देते हुए कहा कि वंशवाद केवल राजनीति में नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में मौजूद है। चाहे डॉक्टरों का परिवार हो, व्यापारी हों या फिल्म उद्योग।”
पहले भी कर चुके हैं मोदी की तारीफ
यह पहली बार नहीं जब शशि थरूर की किसी टिप्पणी से कांग्रेस असहज हुई हो। इस साल की शुरुआत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “देश का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति” बताया था। इस बयान पर भी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी और कहा था कि ऐसे बयान पार्टी की विचारधारा के खिलाफ जाते हैं।
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