भीम आर्मी व हिन्दू संगठनो के बीच झड़प – पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विरोध में पुतला दहन
इंदरगढ़ में बवाल – धीरेन्द्र शास्त्री का पुतला दहन बना हिंसा की वजह, भीम आर्मी और हिंदू संगठनों में झड़प, पुलिस ने चलाए वाटर कैनन और लाठियां

मध्य प्रदेश: दतिया जिले के इंदरगढ़ कस्बे में शनिवार को उस वक्त माहौल बिगड़ गया, जब भीम आर्मी और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। विवाद की शुरुआत बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के पुतले दहन से हुई, जो कुछ ही देर में नारेबाजी, झड़प और पत्थरबाजी में बदल गई। पुलिस को हालात संभालने के लिए लाठीचार्ज और वाटर कैनन तक का इस्तेमाल करना पड़ा। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है और एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
शनिवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (ASP) के करीब 200 से ज्यादा कार्यकर्ता अंबेडकर पार्क से एक जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस का उद्देश्य था.बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विरोध और उनका पुतला दहन।
इस रैली का नेतृत्व ग्वालियर संभागीय अध्यक्ष केशव यादव कर रहे थे। तय योजना के मुताबिक, पुतला दहन ग्वालियर चौराहा पर होना था, लेकिन जुलूस वहाँ पहुँचने से करीब 25 फीट पहले ही कार्यकर्ताओं ने पुतला जला दिया। उसी समय चौराहे पर मौजूद हिंदू संगठनों के 70-80 कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध जताते हुए आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव का पुतला जला दिया। इसके बाद माहौल अचानक गर्म हो गया और दोनों पक्षों के बीच तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई।

नारेबाजी से पथराव तक
पहले तो दोनों पक्षों के बीच केवल नारेबाजी हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों में माहौल इतना बिगड़ गया कि पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर पत्थर फेंके गए, जिससे तीन लोग घायल हो गए।
पत्थरबाजी में आसपास खड़ी कई गाड़ियों के शीशे टूट गए और दुकानों को भी नुकसान पहुँचा है । मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन भीड़ बेकाबू हो चुकी थी।
पुलिस की सख्त कार्रवाई
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने पहले समझाइश दी, लेकिन जब बात नहीं बनी तो लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। कई लोगों को मौके से हटाया गया और भीड़ को तितर-बितर किया गया।
पुलिस ने तत्काल अतिरिक्त बल बुलाया और कस्बे में भारी पुलिस तैनाती कर दी गई। फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है। इंदरगढ़ थाना प्रभारी ने बताया कि “स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन दोनों पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
झड़प के बाद बढ़ी सियासी गहमागहमी
घटना के बाद भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि शास्त्री ने पहले भी जातीय टिप्पणियाँ की थीं और दलित समुदाय का अपमान किया था।
दूसरी ओर, हिंदू संगठनों ने इस विरोध प्रदर्शन को “सनातन धर्म के खिलाफ साजिश” बताया। उनका कहना है कि “संतों और धार्मिक गुरुओं का अपमान करने की यह कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
दोनों पक्षों के दावे
सनातन हिंदू संगठन के नगर अध्यक्ष शिरोमणि सिंह राठौर ने कहा, “पंडित धीरेन्द्र शास्त्री हमेशा समाज में एकता और समानता का संदेश देते हैं। जात-पात मिटाने की बात करते हैं। उनका पुतला जलाना असहनीय है। ऐसे कदम समाज में नफरत फैलाने वाले हैं।”
वहीं, आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने कहा, “हमारा विरोध किसी धर्म या व्यक्ति से नहीं है। लेकिन जब कोई संत सार्वजनिक मंच से अपमानजनक बातें कहता है, तो हम उसका विरोध लोकतांत्रिक तरीके से करेंगे। शास्त्री ने खुद मुझे धमकी दी थी, जिसकी शिकायत हाई कोर्ट में भी की गई है।”
घायल और नुकसान का ब्यौरा
पथराव में तीन लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इंदरगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। तो वहीं, कई वाहनों और दुकानों को भी नुकसान पहुँचा। पुलिस प्रशासन ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन का बयान
एसपी (दतिया) ने बताया कि “स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बातचीत की जा रही है ताकि आगे कोई विवाद न हो।” उन्होंने यह भी कहा कि “कस्बे में धारा 144 लागू कर दी गई है, और अफवाह फैलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है।”