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ममता सरकार के आरक्षण पर फैसले से भड़क उठा मुस्लिम समुदाय,सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

OBC कोटे में फेरबदल के बाद मुस्लिम संगठनों ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप, मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में प्रदर्शन तेज

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार एक नए विवाद में फंस गई है। विवाद की वजह है। सरकार की नई OBC लिस्ट, जिसमें कई मुस्लिम जातियों को या तो बाहर कर दिया गया है या उनकी श्रेणी बदल दी गई है। सरकार के इस कदम से राज्य के मुस्लिम समुदाय में नाराज़गी गहराती जा रही है, और चुनाव से पहले यह मुद्दा बड़ा सियासी संकट बनता दिख रहा है।

क्या है विवाद की जड़?

राज्य सरकार ने हाल ही में पिछड़े वर्ग (OBC) की सूची में संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत कई मुस्लिम समुदायों को पहले की तुलना में कम कोटे वाले वर्ग में डाल दिया गया है, जबकि कुछ हिंदू जातियों को OBC लिस्ट में शामिल कर लिया गया है।

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि “सरकार ने जानबूझकर पिछड़ी मुस्लिम जातियों को सूची से हटा दिया या नीचे की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे उनका आरक्षण प्रतिशत घट गया है।”

सरकार के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम संगठन मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में सड़कों पर उतर आए हैं। बीते महीने मुर्शिदाबाद में हजारों लोगों ने विरोध मार्च निकाला, जिसमें सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की गई।

पुरानी व्यवस्था क्या थी?

अब तक पश्चिम बंगाल सरकार की OBC लिस्ट को दो हिस्सों में बांटा गया था,
OBC A (10% आरक्षण) और OBC B (7% आरक्षण)। पुरानी लिस्ट में मुस्लिम समुदाय की लगभग 80% आबादी को शामिल किया गया था, जिससे उन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल रहा था।

पुराने आंकड़ों के अनुसार

  •  OBC A में 72 मुस्लिम जातियां और 8 गैर-मुस्लिम जातियां थीं।
  •  OBC B में 35 मुस्लिम जातियां और 14 गैर-मुस्लिम जातियां शामिल थीं।

अब क्या बदला है?

इस साल मई-जून में राज्य सरकार ने एक नया सर्वे करवाया था। इस सर्वे के आधार पर सरकार ने नई OBC लिस्ट तैयार की, जिसमें बड़ा फेरबदल हुआ।

नई सूची में –

  • OBC A में अब 40 मुस्लिम और 51 गैर-मुस्लिम जातियां हैं।
  • OBC B में 41 मुस्लिम और 50 गैर-मुस्लिम जातियां शामिल की गई हैं।

यानी, न सिर्फ कई मुस्लिम जातियां लिस्ट से बाहर हो गईं, बल्कि जो बची भी हैं, उन्हें अधिकतर 10% वाले A वर्ग से हटाकर 7% वाले B वर्ग में डाल दिया गया है।

कौन सी जातियां हुई प्रभावित?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोग्रेसिव इंटेलेक्चुअल ऑफ बंगाल के अध्यक्ष मनाजात बिस्वास ने कहा कि कुल 37 मुस्लिम जातियों को हटाया गया है, जिनमें से 16 OBC A और 21 OBC B में थीं। इसके अलावा 34 मुस्लिम और 7 गैर-मुस्लिम उपजातियों को OBC A से हटाकर OBC B में डाल दिया गया है।

बिस्वास के अनुसार, “शहरशाबादिया, खोट्टा, मलिक और राजमिस्त्री जैसे मुस्लिम समुदाय अब OBC B में हैं, जबकि कई बड़ी हिंदू जातियां OBC A में पहुंच गई हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि “माझी समुदाय” में भेदभाव किया गया है, मुस्लिम माझियों को सूची से हटा दिया गया, जबकि गैर-मुस्लिम माझियों को OBC A में शामिल कर लिया गया है।

क्यों नाराज़ हैं मुस्लिम संगठन?

इन बदलावों के चलते मुस्लिम समाज की कई जातियों को अब कम कोटे का लाभ मिलेगा। पहले जो समुदाय 10% आरक्षण वाले वर्ग में थे, अब उन्हें केवल 7% का लाभ मिलेगा। इससे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों की भर्ती में पिछड़ी मुस्लिम जातियों के युवाओं को नुकसान होने की आशंका है।

प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि “सरकार के इस कदम से हजारों मुस्लिम छात्र कॉलेजों में एडमिशन से वंचित रह गए हैं। उनका यह भी कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर राज्य की स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) की भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को 31 दिसंबर तक पूरा करने का आदेश दिया है, ऐसे में विरोध प्रदर्शन और जटिल स्थिति पैदा कर सकते हैं।”

सरकार पर बढ़ता दबाव

ममता बनर्जी सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर सावधानी बरत रही है। हालांकि, उन्होंने अभी तक इस विवाद पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि ममता सरकार ने “मुस्लिम वोट बैंक” को लेकर जो राजनीति की थी, वही अब उनके खिलाफ जा रही है।

भाजपा ने इस विवाद को मुद्दा बनाते हुए कहा है कि “ममता बनर्जी केवल तुष्टीकरण करती हैं, लेकिन जब असली हक देने की बात आती है, तो भेदभाव करती हैं।”

प्रदर्शनकारियों की मांग

विरोध कर रहे मुस्लिम संगठनों की मुख्य मांग है कि सरकार तुरंत पुरानी लिस्ट को बहाल करे और नई लिस्ट में किए गए बदलावों को वापस ले। साथ ही, वे चाहते हैं कि OBC आरक्षण को बढ़ाकर 25% किया जाए, ताकि सभी पिछड़ी मुस्लिम जातियों को आरक्षण का लाभ मिल सके।

OBC लिस्ट में बदलाव को लेकर ममता सरकार की मंशा भले प्रशासनिक सुधार की रही हो, लेकिन इसका असर अब सियासी और सामाजिक दोनों स्तरों पर दिखने लगा है।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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