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150 से ज्यादा टीवी शोज़ में किया काम,आज भिक्षा मांगकर क्यों गुजर कर रही हैं नुपुर अलंकार?

चमक-दमक छोड़कर अपनाया अध्यात्म, मां और बहन के निधन के बाद लिया बड़ा फैसला — अब दिन में एक बार भोजन और भगवान की भक्ति में बिताती हैं जीवन

चमक-दमक छोड़कर

एक वक्त था, जब टीवी की दुनिया में नुपुर अलंकार का नाम एक पहचान बन चुका था। छोटे पर्दे पर उनका चेहरा हर घर में जाना-पहचाना था। ‘शक्तिमान’ से लेकर ‘दीया और बाती हम’ तक, उन्होंने अपने अभिनय से लोगों का दिल जीता। लेकिन, जिंदगी ने जैसे उन्हें एक दूसरा रास्ता दिखा दिया। कभी कैमरे की रौशनी में चमकने वाली नुपुर आज आध्यात्म की राह पर हैं। न शोहरत की परवाह, न स्टेज की तड़क-भड़क, अब वह भिक्षा मांगकर गुजारा कर रही हैं और भगवान की भक्ति में लीन हैं।

27 साल की उम्र में छोड़ दी एक्टिंग की दुनिया

नुपुर अलंकार ने लगभग 27 साल तक मनोरंजन की दुनिया में काम किया। उन्होंने करीब 150 से ज्यादा टीवी शोज़ में हिस्सा लिया। हर किरदार में अपनी सादगी और गहराई से जान डाल दी। लेकिन 2022 में उन्होंने अचानक सबकुछ छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा था कि अब उनका मन इस दुनिया में नहीं लगता, अब उन्हें आत्मिक शांति चाहिए।

एक नई पहचान

नुपुर सिर्फ टीवी की अदाकारा नहीं थीं, उन्होंने फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। ‘सांवरिया’ और ‘सोनाली केबल’ जैसी फिल्मों में उन्होंने छोटे लेकिन असरदार किरदार निभाए। टीवी पर ‘राजाजी’, ‘घर की लक्ष्मी बेटियां’ और ‘दीया और बाती हम’ जैसे हिट शोज़ में उनकी भूमिकाएं लोगों को याद हैं।

क्यों लिया सन्यास का फैसला?

उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब सबकुछ बदल गया। पहले पीएमसी बैंक घोटाले ने उनकी बचत को निगल लिया। मां की तबीयत खराब हुई तो इलाज में सारा पैसा चला गया। मां के निधन के बाद उनकी बहन ही उनका सहारा थीं, लेकिन कुछ ही समय बाद बहन का भी निधन हो गया। नुपुर बताती हैं कि उस समय उन्हें लगा जैसे जीवन में अब कुछ बचा ही नहीं है। उन्होंने कहा था, “मां के जाने के बाद मेरे ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं रही। अब बस भगवान ही मेरे सहारा हैं।”

पति और परिवार ने दिया साथ

नुपुर ने 2002 में अलंकार श्रीवास्तव से शादी की थी। जब उन्होंने सन्यास लेने का फैसला किया तो उनके पति और ससुराल वालों ने भी उनका पूरा साथ दिया। उनके पति ने कहा कि अगर यही उन्हें सच्ची शांति देता है तो उन्हें पूरी तरह समर्थन है। नुपुर ने गुरु शंभू शरण झा के मार्गदर्शन में संन्यासी जीवन अपनाया।

भिक्षा मांगकर करती हैं, गुजारा

अब नुपुर मुंबई की भीड़-भाड़ से बहुत दूर, अध्यात्म के रास्ते पर हैं। वह किसी मठ या आश्रम में नहीं रहतीं, बल्कि यात्राओं पर रहती हैं। वह भिक्षा मांगकर भोजन करती हैं, दिन में सिर्फ एक बार खाना खाती हैं और जमीन पर सोती हैं। उनका मानना है कि “वो संन्यासी नहीं जो भिक्षा मांगकर नहीं खाता।”

कुछ समय पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भिक्षा मांगते हुए तस्वीरें साझा की थीं। तस्वीरों में वह सादे वस्त्रों में थीं और छह लोगों से मिली भिक्षा के साथ मुस्कुराती नजर आईं। उन्होंने लिखा था कि यह उनके जीवन का “पहला दिन” था जब उन्होंने भिक्षा मांगकर भोजन किया।

सोशल मीडिया से भी दूरी

जब उन्होंने 2023 में आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी, तब अपनी यात्राओं की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती थीं। लेकिन जब लोगों ने उन्हें पहचानना शुरू किया, तो उन्होंने पोस्ट करना बंद कर दिया। अब वह पूरी तरह से सादगीभरा जीवन जी रही हैं। बिना मोबाइल, बिना लाइमलाइट, सिर्फ साधना और ध्यान में मग्न।

नुपुर ने बताया था कि उन्होंने “भारत के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा की गुफाओं, जंगलों और दूरदराज के आश्रमों में रहीं। कई बार ठंडे तापमान में बिना किसी सुख-सुविधा के दिन बिताए, चूहों ने काटा, मच्छरों ने परेशान किया, पर उन्होंने कहा कि “वहां मुझे शांति मिली।” वहीं उन्होंने ये भी कहा कि, “मैं आराम के बिना जीवन का अनुभव करना चाहती थी। जब मैंने सबकुछ छोड़ दिया, तब समझ आया कि सच्ची खुशी सादगी में है।”

अब क्या कर रही हैं नुपुर?

आज नुपुर अलंकार पूरी तरह से सन्यासिन बन चुकी हैं। वह भगवान की आराधना में दिन बिताती हैं और जीवन के हर पल को भक्ति में समर्पित करती हैं। उन्हें न अब शोहरत की चाह है, न पैसे की। जो कभी टीवी की दुनिया में पहचान का चेहरा थीं, वह अब एक साध्वी की तरह अपनी आत्मा के साथ जी रही हैं।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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