मुजफ्फरपुर से महागठबंधन का चुनावी शंखनाद — राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी एक मंच पर; पलायन, रोजगार और स्टार्टअप बना बिहार चुनाव का नया एजेंडा।

मुजफ्फरपुर: बिहार विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा के बाद आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव पहली बार एक साथ मंच साझा करते नज़र आए। मुजफ्फरपुर के सकरा विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन ने अपनी पहली बड़ी जनसभा के जरिए चुनावी शंखनाद किया। राहुल गांधी की यह मुजफ्फरपुर में पहली जनसभा थी। मंच पर उनके साथ वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी, कांग्रेस प्रत्याशी उमेश कुमार राम (सकरा) और विजेंद्र चौधरी (नगर) भी मौजूद रहे। इस रैली को महागठबंधन के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
राहुल गांधी पर भाजपा का पलटवार
राहुल गांधी के बिहार दौरे को लेकर सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि “कोलंबिया में छुट्टियों और वीडियो ब्लॉग में व्यस्त रहने वाले राहुल गांधी को बिहार की जनता की चिंता नहीं है।” भाजपा ने कहा कि “महागठबंधन बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर केवल वादे करता है, ठोस योजना नहीं।”
वहीं, महागठबंधन ने दावा किया है कि उनकी सरकार बनने पर 20 दिन के भीतर ‘रोजगार कानून’ लागू किया जाएगा और हर भूमिहीन परिवार को ज़मीन दी जाएगी।
पलायन — बिहार की सबसे बड़ी चुनौती
बिहार में पलायन का मुद्दा हर चुनाव में दोहराया जाता रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य के 74.54 लाख लोग दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 22.65 लाख यानी 30% लोग रोज़गार की तलाश में घर छोड़ चुके हैं।
आईएलओ (ILO) की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि बिहार के लगभग 39% प्रवासी काम के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं — यानी हर 10 में से 4 युवा आजीविका के लिए पलायन को मजबूर हैं। हालांकि पीएलएफएस (PLFS) के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी दर 2018-19 के 31% से घटकर 2023-24 में करीब 10% पर आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग असंगठित क्षेत्र या राज्य से बाहर काम कर रहे हैं।

एनडीए सरकार का दावा और विपक्ष की चुनौती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में कहा कि उनकी सरकार ने अब तक 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। उन्होंने दावा किया कि अगर एनडीए दोबारा सत्ता में आया, तो अगले पाँच वर्षों में 1 करोड़ नई नौकरियां सृजित की जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि बिहार को “स्टार्टअप हब” बनाया जाएगा, ताकि युवाओं को राज्य छोड़ना न पड़े।
विपक्ष ने नीतीश सरकार के दावों को “खोखला” बताते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में पलायन की जड़ तक पहुंचने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। तेजस्वी यादव ने दोहराया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर “हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी” दी जाएगी।

प्रशांत किशोर की एंट्री और नया वादा
बिहार की सियासत में पहली बार अपनी पार्टी “जन सुराज” के साथ उतर रहे प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो “किसी को रोज़ी-रोटी के लिए बिहार से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।” किशोर का कहना है कि राज्य में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। उनका फोकस स्थानीय उद्योग, खेती और शिक्षा प्रणाली को मज़बूत करने पर है।

बिहार में बढ़ता स्टार्टअप कल्चर
पलायन के बीच बिहार के स्टार्टअप सेक्टर ने उम्मीद जगाई है। 2016 में ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के बाद राज्य में अब तक 3,185 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं। 2025 की शुरुआत तक यह संख्या 3,286 तक पहुंच चुकी है। बिहार अब स्टार्टअप रैंकिंग में देश में 13वें स्थान पर है — पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों से आगे।
पटना इस इकोसिस्टम का केंद्र बनकर उभरा है, जहां 650 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। मुजफ्फरपुर में 69 और पूर्वी चंपारण में 64 स्टार्टअप काम कर रहे हैं। राज्य सरकार के पोर्टल के अनुसार, अब तक लगभग 30,610 लोगों को स्टार्टअप्स के ज़रिए रोजगार मिला है, जिनमें से 87% नौकरियां पिछले पाँच वर्षों में सृजित हुई हैं।
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