तेजस्वी यादव से लेकर धर्मेंद्र प्रधान और बेबी देवी तक मतदाताओं के गुस्से को शांत करने के लिए नेताओं को झुकाना पड़ा सिर।

बिहार में चुनावी माहौल इस समय पूरी तरह गरम है। हर प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में वोटरों को लुभाने के लिए पसीना बहा रहा है। जनता से जुड़ने के लिए नेता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन ज़रा सी गलती या गलत बयान पर जनता का मूड बिगड़ता जा रहा है। कई जगहों पर तो उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को माफी तक मांगनी पड़ रही है। अब ऐसा लगता है कि इस चुनाव में सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि “माफी” भी एक अहम रणनीति बन गई है।
तेजस्वी यादव ने मांगी माफी
खगड़िया जिले के अलौली विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में एक घटना ने विपक्षी महागठबंधन को असहज कर दिया। यहां आरजेडी के उम्मीदवार रामवृक्ष सदा का एक ऑडियो वायरल हो गया, जिसमें वो यह कहते सुनाई दिए कि “एक खास समुदाय के लोग हमें नहीं, लालू और तेजस्वी को वोट देते हैं, हम उनकी खुशामद नहीं करेंगे।” यह बात फैलते ही लोगों का गुस्सा भड़क गया। मतदाताओं ने इस बयान को अपने अपमान के रूप में लिया। मामला जब तेजस्वी यादव तक पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। तेजस्वी ने मंच से कहा, “अगर हमारे किसी साथी की बात से किसी की भावना आहत हुई है, तो मैं माफी मांगता हूं।” उन्होंने सदा को भी वहीं से जनता से माफी मांगने को कहा।
धर्मेंद्र प्रधान ने भी झुकाया सिर
इसी तरह दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के प्रचार अभियान के दौरान एक और विवाद सामने आया। यहां मिथिला की लोकगायिका मैथिली ठाकुर बीजेपी की उम्मीदवार हैं। प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश की बीजेपी विधायक केतकी सिंह आई थीं।
केतकी ने भाषण के दौरान लोगों से पूछा, “मिथिला का असली सम्मान मैथिली है या पाग?” और फिर हाथ में रखी पाग (मिथिलांचल की परंपरागत शान मानी जाती है) को हवा में उछाल दिया। यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। लोगों ने इस पर नाराज़गी जताई और कहा कि “पाग को अपमानित किया गया है।” विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को और भुनाया, जिसके चलते बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गईं।
बढ़ते विरोध को देखते हुए केंद्रीय मंत्री और बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान को खुद सामने आना पड़ा। उन्होंने दरभंगा में जनसभा के दौरान कहा, “केतकी जी की नासमझी से लोगों की भावनाएं आहत हुईं। मैं मिथिला के हर नागरिक से माफी मांगता हूं।” उनकी इस बात के बाद भी लोगों में हलचल रही, लेकिन माहौल पहले से कुछ शांत हो गया। मिथिला क्षेत्र में इस बयान के बाद बीजेपी को अब “संस्कृति के सम्मान” को मुख्य मुद्दा बनाकर नुकसान की भरपाई करनी पड़ रही है।

बेबी देवी का नया अंदाज़
इधर, मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां विधानसभा क्षेत्र में बेबी देवी का अंदाज़ बाकी सब से थोड़ा अलग दिखा। इस बार उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने टिकट दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान जब मतदाता उनसे पुराने मुद्दों पर सवाल पूछते हैं, तो वे मुस्कराते हुए कहती हैं,“मेरी पिछली गलती को माफ कर दीजिए, इस बार मुझे आशीर्वाद दीजिए।”
उनकी यह विनम्र अपील कई लोगों को हैरान भी कर रही है, क्योंकि आमतौर पर नेता अपनी गलतियां मानने से बचते हैं। लेकिन बेबी देवी का यह “माफी मांगने वाला” स्टाइल अब उनके प्रचार की खास पहचान बन गया है। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनका यह तरीका लोगों के दिल को छू रहा है, खासकर उन मतदाताओं का जो भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस करते हैं।

हर तरफ माफी का दौर
बिहार चुनाव के इस दौर में यह साफ दिखाई दे रहा है कि नेता जनता के मूड को लेकर बेहद सतर्क हैं। एक गलत शब्द या बयान अब तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है। मतदाता भी अब पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हैं, वे सिर्फ पार्टी या चेहरे पर नहीं, बल्कि नेताओं के बयानों और बर्ताव पर भी नज़र रखते हैं।
इस माहौल में ‘ माफी मांगना ‘ अब राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि एक जरूरी कदम बन गया है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही ओर से उम्मीदवार जनता से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कोई गलती पर झुककर माफी मांग रहा है, तो कोई विनम्रता दिखाकर दिल जीतने की कोशिश कर रहा है।
अब सवाल यही है कि ये माफियाँ सिर्फ चुनावी रणनीति हैं या वाकई नेताओं की गलती सुधारने की कोशिश। जवाब तो आने वाले चुनाव परिणाम ही देंगे, लेकिन इतना तय है कि इस बार बिहार की राजनीति में ‘ माफी ‘ एक नया राजनीतिक शब्द बन गया है। जो न झुकने वाले नेताओं को भी सिर झुकाने पर मजबूर कर रहा है।