वैज्ञानिकों का दावा, mRNA तकनीक इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बनाती है कि वह ट्यूमर कोशिकाओं को पहचानकर खत्म कर सके।

कोरोना महामारी के दौरान जिस mRNA कोविड वैक्सीन ने लाखों जिंदगियों को बचाया, वही वैक्सीन अब एक और बड़ी बीमारी कैंसर के इलाज में नई उम्मीद बनकर सामने आई है। हाल ही में आई एक दिलचस्प रिसर्च रिपोर्ट ने मेडिकल साइंस की दुनिया में हलचल मचा दी है। इस रिसर्च से पता चला है कि mRNA वैक्सीन सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए ही नहीं, बल्कि यह शरीर की इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बना सकती है कि वह कैंसर की कोशिकाओं से भी प्रभावी तरीके से लड़ सके।
रिसर्च में सामने आई बड़ी बात
अमेरिका के टेक्सास एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर और फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 1,000 से अधिक कैंसर मरीजों पर एक विस्तृत अध्ययन किया। इनमें ऐसे मरीज शामिल थे जिन्हें फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) या मेलेनोमा (Skin Cancer) था। नतीजे हैरान करने वाले थे जिन मरीजों ने इम्यूनोथेरेपी के साथ mRNA कोविड वैक्सीन (जैसे फाइजर या मॉडर्ना) ली थी, उनकी जीवन अवधि लगभग दोगुनी हो गई। जिन मरीजों ने वैक्सीन ली थी, वे औसतन 37.3 महीने तक जिए, जबकि बिना वैक्सीन वालों की औसत जीवन अवधि सिर्फ 20.6 महीने रही। यानी, वैक्सीन ने शरीर को कैंसर से लड़ने में अधिक ताकत दी।
कैसे मदद करती है mRNA वैक्सीन
mRNA वैक्सीन की खासियत यह है कि यह शरीर में असली वायरस नहीं डालती, बल्कि वायरस के mRNA (मैसेंजर आरएनए) का इस्तेमाल कर शरीर को लड़ाई के लिए तैयार करती है। यह तकनीक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को इस तरह एक्टिव करती है कि वह किसी भी असामान्य कोशिका को पहचानकर उसे खत्म करने में सक्षम हो जाती है।
कैंसर के इलाज में जब इस वैक्सीन को इम्यून चेकपॉइंट इन्हिबिटर्स (एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी) के साथ दिया गया, तो शरीर ने ट्यूमर की कोशिकाओं पर और भी जोरदार हमला किया। यह वैक्सीन PD-L1 नामक प्रोटीन को बढ़ाती है, जो ट्यूमर को इम्यून सिस्टम से छिपने से रोकता है। नतीजा शरीर कैंसर की कोशिकाओं को आसानी से पहचान कर उन्हें नष्ट करने लगता है।
कैंसर थैरेपी में नया मोड़
वैज्ञानिकों का कहना है कि mRNA तकनीक ने कैंसर थैरेपी के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखा दी है। अब तक कैंसर का इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी, रेडिएशन और इम्यूनोथेरेपी तक सीमित था, लेकिन अब mRNA वैक्सीन को इसमें जोड़ने से इलाज की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ मरीजों की जिंदगी लंबी हो सकती है, बल्कि इलाज के दौरान आने वाले साइड इफेक्ट्स भी कम किए जा सकते हैं।
रिसर्च के पीछे की सोच
डॉ. एडम ग्रिपिन, जो रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में सीनियर रेजिडेंट हैं, उनका कहना है कि यह वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम को ‘ सुपरचार्ज ‘ कर देती है। उनके अनुसार, “जब मरीज को कैंसर होता है, तो उसका शरीर थक जाता है। इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और ट्यूमर बढ़ने लगता है। लेकिन जब हम mRNA वैक्सीन देते हैं, तो इम्यून सिस्टम दोबारा सक्रिय होकर ट्यूमर को पहचानने और खत्म करने लगता है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्साह
यह अध्ययन 2025 के यूरोपियन सोसाइटी फॉर मेडिकल ऑन्कोलॉजी (ESMO) कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया और बाद में Nature Journal में प्रकाशित हुआ। रिसर्चर्स का कहना है कि यह शुरुआत भर है। आने वाले वर्षों में mRNA तकनीक को अलग-अलग प्रकार के कैंसर पर आजमाया जाएगा, जैसे ब्रेस्ट कैंसर, कोलन कैंसर, और ब्लड कैंसर।
कई फार्मा कंपनियां पहले से ही इस दिशा में काम कर रही हैं। खासतौर पर मॉडर्ना (Moderna) और बायोएनटेक (BioNTech), जो कोविड वैक्सीन बनाने में अग्रणी थीं, अब कैंसर के लिए विशेष पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन तैयार कर रही हैं।
जीवनशैली से जुड़ा पहलू
अब सवाल उठता है कि mRNA वैक्सीन के इस नए उपयोग से लाइफस्टाइल पर क्या असर पड़ेगा? कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां अक्सर खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और तनाव से जुड़ी होती हैं। अगर mRNA तकनीक जैसी वैज्ञानिक खोजें इन बीमारियों से लड़ने में मदद करती हैं, तो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति और जागरूक होंगे।
साथ ही डॉ ये भी चेतावनी देते हैं कि कोई भी वैक्सीन या दवा संतुलित जीवनशैली का विकल्प नहीं हो सकती। सही खानपान, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से दूरी, और नियमित स्वास्थ्य जांच, ये सब चीजें अब भी बीमारियों से बचाव के सबसे बड़े हथियार हैं।
भारत के संदर्भ में क्यों अहम है यह खोज?
भारत जैसे देश में, जहां कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह खोज बहुत मायने रखती है। अक्सर मरीज तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते जब तक बीमारी काफी बढ़ नहीं जाती। अगर भविष्य में mRNA तकनीक से ऐसी वैक्सीनें बन सकें जो शुरुआती चरण में कैंसर को रोक सकें, तो यह भारत के लिए वरदान साबित होगा।
इसके अलावा, कोविड महामारी ने हमारे देश में टीकाकरण को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाया है। अब जब mRNA वैक्सीन को कैंसर के इलाज में इस्तेमाल किया जाएगा, तो मरीजों में इसे अपनाने को लेकर हिचक कम होगी।
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