तेजस्वी बोले सरकार बनी तो ‘वक्फ़ बिल को कूड़ेदान में फेंक देंगे!’ क्या सच में कर सकते हैं केंद्र का कानून रद्द?
बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने कटिहार में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी, तो केंद्र द्वारा पारित वक्फ़ (संशोधन) अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।
तेजस्वी ने यह भी कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने कभी सांप्रदायिक ताकतों से समझौता नहीं किया, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा ऐसी ताकतों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि इसका असली नाम ‘भारत जलाओ पार्टी’ होना चाहिए।
बिहार की जनता अब नीतीश से थक चुकी है
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर 20 साल के शासन में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब नीतीश से थक चुकी है और मुख्यमंत्री अब होश में नहीं हैं।
इसके साथ ही उन्होंने सीमांचल क्षेत्र के विकास का वादा किया और कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो सीमांचल विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।
NDA कर रही घोषणाओं की नकल
तेजस्वी ने अपने चुनावी वादों का हवाला देते हुए कहा कि एनडीए उनकी घोषणाओं की नकल कर रही है। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर कहा कि एनडीए ने इसे 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया, जबकि उनकी सरकार बनने पर यह 2000 रुपये प्रति माह कर दी जाएगी।
उन्होंने कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जैसे सीमांचल के जिलों में विकास के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया।

वक्फ़ बिल पर विवाद
इससे पहले शनिवार को राजद एमएलसी मोहम्मद कारी सोहैब ने कहा था कि अगर तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बने तो सभी बिल, जिनमें वक्फ़ बिल भी शामिल है, फाड़ दिए जाएंगे।इस बयान के बाद सियासी घमासान मच गया। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि कोई मुख्यमंत्री केंद्र द्वारा पारित कानून को कैसे रद्द कर सकता है।
केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव
वक्फ़ (संशोधन) अधिनियम अप्रैल में संसद से पास हुआ था। केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय, खासकर पिछड़े वर्गों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पारदर्शिता लाने वाला है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह अधिनियम मुस्लिमों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।