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बिहार में टिकट नहीं मिला तो बीजेपी नेता अजय झा ने ओढ़ लिया कफ़न, नाटकीय अंदाज में बोले ‘कभी भी कुछ भी कर सकता हूँ ‘

नरपतगंज सीट से टिकट न मिलने पर वरिष्ठ नेता ने जताया आक्रोश, कहा “अब निर्दलीय लड़ूंगा और दिखाऊंगा असली जातिवाद कहां छिपा है।”

अजय झा बोले—”25 साल की निष्ठा का मिला धोखा”, समर्थकों संग किया विरोध प्रदर्शन; पत्नी संजू झा बोलीं—”अगर टिकट जाति के हिसाब से बंटेगा, तो बोर्ड लगा दो सीटों पर।”

अजय झा भाजपा नेता टिकट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इससे पहले ही टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा (BJP) के भीतर घमासान शुरू हो गया है। अररिया ज़िले की नरपतगंज विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय झा ने गुरुवार को कफ़न ओढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया।

25 साल से BJP में सक्रिय, लेकिन टिकट से वंचित

अजय झा पिछले 25 वर्षों से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने “पार्टी के लिए तन, मन और धन से योगदान दिया, लेकिन इस बार उन्हें मेहनत की कीमत नहीं मिली। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि जब लोकसभा चुनाव चल रहे थे, तब भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, मंगल पांडे, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल ने उन्हें भरोसा दिया था कि अगली विधानसभा में टिकट उन्हीं को मिलेगा। लेकिन जब उम्मीदवारों की सूची जारी हुई, तो उनका नाम गायब था। भाजपा ने नरपतगंज से देवंती यादव को उम्मीदवार घोषित कर दिया।

इस फैसले से नाराज़ अजय झा ने कहा, “जब मेहनत करने वालों को किनारे कर दिया जाए और जातीय समीकरण को प्राथमिकता दी जाए, तो फिर ये नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ दिखावा रह जाता है।”

“अब मैंने कफ़न ओढ़ लिया है”

भाजपा नेता अजय झा ने अपने विरोध का तरीका भी अनोखा चुना। उन्होंने कफ़न ओढ़कर प्रदर्शन किया और कहा कि वह अब किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनके शब्दों में —“मैंने अब कफ़न ओढ़ लिया है। पार्टी ने जो मेरे साथ अन्याय किया है, उसे मैं यूं नहीं छोड़ूंगा। कभी भी कुछ भी कर सकता हूं।”

इस प्रदर्शन के दौरान वह काफी भावुक दिखे। उनके आसपास बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे, वहां अन्य परिजन भी उनके साथ समर्थक में जुट गए।

पत्नी ने भी खोला मोर्चा

अजय झा की पत्नी संजू झा ने भी खुलकर भाजपा के खिलाफ बयान दिया। उन्होंने कहा कि “अगर पार्टी को हर सीट पर सिर्फ जातीय समीकरण देखना है, तो उन्हें यह साफ-साफ लिख देना चाहिए कि “कौन-सी सीट किस जाति के लिए आरक्षित है।”

साथ ही उनकी पत्नी ने भाजपा के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा “अगर टिकट जात-पात देखकर बांटे जा रहे हैं, तो ‘सबका साथ, सबका विकास’ कहना बेईमानी है। मेरे पति ने सालों तक पार्टी के लिए काम किया, फिर भी हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया।” संजू झा ने आगे ऐलान किया कि अगर पार्टी ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी।

भाजपा ने पुराने समीकरण को दी प्राथमिकता

सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने नरपतगंज में इस बार सामाजिक संतुलन और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर टिकट दिया है। 2020 के चुनाव में यहां से जयप्रकाश यादव भाजपा उम्मीदवार थे, लेकिन इस बार उनका टिकट काटकर देवंती यादव को मैदान में उतारा गया है। पार्टी का मानना है कि यादव समुदाय का मतदाता इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है, इसलिए नया चेहरा उतारा गया है।

लेकिन अजय झा का कहना है कि “पार्टी ने जातीय राजनीति में उलझकर वफादार कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे और जनता के बीच भाजपा की भीतरी राजनीति को उजागर करेंगे।

“भाजपा में मेहनत की नहीं, जात की कद्र”

प्रदर्शन के दौरान अजय झा बार-बार यह कहते दिखे कि भाजपा अब वैचारिक पार्टी नहीं रही, बल्कि वह जातीय संतुलन के नाम पर टिकट बांटने वाली संस्था बन गई है। उन्होंने कहा, “25 साल पार्टी में रहकर भी अगर मेहनत का इनाम नहीं मिला, तो समझिए अब पार्टी में जात की राजनीति हावी है। भाजपा अब समर्पित कार्यकर्ताओं की नहीं, समीकरणों की पार्टी बन गई है।”

निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान

प्रदर्शन के तुरंत बाद झा ने स्पष्ट किया कि वह अब भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सत्ता पाना नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर की ‘जातिवादी सोच’ को जनता के सामने लाना है। उधर, उनकी पत्नी संजू झा ने भी कहा कि “वे परिवार समेत जनता का समर्थन लेकर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी।” भाजपा की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि “पार्टी नेतृत्व स्थिति को शांत करने की कोशिश में है ताकि यह मामला ज्यादा न बढ़े।”

अररिया में सियासी तापमान चढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अररिया ज़िले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष खुलकर सामने आ गया है। कुछ लोग अजय झा के समर्थन में हैं, तो कुछ पार्टी हाईकमान के फैसले को सही बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं और इसे “बीजेपी की अंदरूनी कलह” बता रहे हैं।

टिकट से ज्यादा बड़ा मुद्दा बना सम्मान

आपको बता दें, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने दो चरणों में मतदान की तारीखें घोषित कीं — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। अजय झा का यह मामला बिहार की राजनीति में टिकट बंटवारा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक मुद्दा भी बन चुका है। अगर ऐसे हालात जारी रहे तो आने वाले समय में भाजपा को सिर्फ बाहरी विपक्ष ही नहीं, बल्कि आंतरिक असंतोष से भी निपटना पड़ेगा।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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