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अब ब्रेस्ट कैंसर से पता चलेगा हार्ट रोग का खतरा! कैसे लाखों-करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है ये मॉडल?

अब ब्रेस्ट कैंसर से पता चलेगा हार्ट रोग का खतरा

एक ऐसी स्टडी जो हमें एक नई सोच देती है, कि बीमारियों को केवल इलाज से नहीं, बल्कि जागरूकता और जीवनशैली से भी हराया जा सकता है।

अब ब्रेस्ट कैंसर से पता चलेगा हार्ट रोग का खतरा

सोचिए, अगर डॉक्टर किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के समय ही यह बता सकें कि उसे आने वाले वर्षों में दिल की बीमारी होने की कितनी संभावना है — तो यह चिकित्सा जगत के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि होगी। अब यह सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता के करीब है। हाल ही में JAMA Oncology में प्रकाशित एक नई स्टडी ने यह दिखाया है कि कैंसर उपचार के दौरान ही हृदय रोग के जोखिम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। यह अध्ययन न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी बेहद अहम है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रही हैं। यह भविष्य की उस दिशा की ओर इशारा करता है, जहां इलाज केवल बीमारी को मिटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य के खतरों से भी बचाने का काम करेगा।

एक नई उम्मीद – स्टडी क्या कहती है?

इस शोध में शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 26,000 से अधिक महिलाओं को लंबे समय तक फॉलो किया गया। रिसर्चर्स ने एक ऐसा रिस्क प्रेडिक्शन मॉडल तैयार किया है जो यह पहचान सकता है, कि किन महिलाओं में भविष्य में हार्ट फेल्योर या कार्डियोमायोपैथी का खतरा अधिक है।

यह मॉडल मरीज की उम्र, स्वास्थ्य इतिहास, पहले से मौजूद हृदय रोग, कैंसर की दवाओं की किस्म, और जीवनशैली के कारकों के आधार पर काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह मॉडल लगभग 79 प्रतिशत सटीकता के साथ हार्ट से जुड़ी संभावनाओं का पूर्वानुमान लगा सकता हैं। यानी 10 में से 8 मामलों में यह सही साबित होता है।

ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट की बीमारी का रिश्ता

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में जो दवाइयाँ दी जाती हैं, खासकर एंथ्रासाइक्लिन और HER2-टार्गेटेड थेरेपी, वे कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में असरदार तो हैं, लेकिन इनका एक साइड इफेक्ट है। ये दिल की मांसपेशियों पर असर डाल सकती हैं। अक्सर मरीज कैंसर से तो उबर जाते हैं, लेकिन कुछ सालों बाद उन्हें हृदय संबंधी समस्याएँ होने लगती हैं। यह स्थिति खासतौर पर उन देशों में चुनौतीपूर्ण है, जैसे भारत, जहाँ फॉलो-अप जांच और हार्ट मॉनिटरिंग की सुविधाएँ सीमित हैं।

इस मॉडल की ज़रूरत क्यों है?

अब तक डॉक्टर कैंसर के इलाज के दौरान अधिकतर फोकस ट्यूमर खत्म करने पर रखते थे। लेकिन अब यह मॉडल डॉक्टरों को इलाज के साथ-साथ भविष्य के जोखिमों पर भी नजर रखने में मदद करेगा।

मान लीजिए किसी महिला में यह मॉडल दिखाता है कि उसे 10 साल में हार्ट की बीमारी का खतरा ज्यादा है, तो डॉक्टर उसके इलाज को उसी के मुताबिक कस्टमाइज कर सकते हैं :

  • दवाओं की खुराक घटाई जा सकती है।
  • कम हानिकारक विकल्प चुने जा सकते हैं।
  • और हार्ट-प्रोटेक्टिव दवाओं का इस्तेमाल पहले ही शुरू किया जा सकता है।

इस तरह इलाज सुरक्षित, व्यक्तिगत (personalized) और दीर्घकालिक रूप से बेहतर बन सकता है।

रिसर्च के अनुसार –

स्टडी के अनुसार, जिन महिलाओं को कम जोखिम वाला (low risk) माना गया, उनमें 10 साल में हार्ट की बीमारी का खतरा सिर्फ 1.7% था। वहीं, हाई रिस्क ग्रुप की महिलाओं में यह संभावना लगभग 20% तक पाई गई। यानी करीब 12 गुना ज्यादा!

यह फर्क बताता है, कि अगर पहले ही पहचान हो जाए तो इलाज का रुख पूरी तरह बदल सकता है। डॉक्टर अब यह तय कर सकते हैं कि किसे सख्त मॉनिटरिंग की जरूरत है और किसे हल्के फॉलो-अप से ही काम चल सकता है।

भारत में क्यों है यह खास अहमियत?

भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामले पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम उम्र में सामने आते हैं। कई महिलाओं को 40 या 45 की उम्र में ही इसका पता चलता है। यह उम्र वैसे भी हार्ट डिजीज के शुरुआती खतरों की दहलीज मानी जाती है।

साथ ही, भारतीय महिलाओं में सामाजिक और आर्थिक कारणों से इलाज के बाद नियमित जांच करवाने की प्रवृत्ति कम होती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह मॉडल भारत में लागू होता है, तो डॉक्टरों को पहले से जोखिम वाले मरीजों की पहचान करने में मदद मिलेगी, और सरकारें या अस्पताल ऐसे मरीजों के लिए विशेष निगरानी योजनाएं बना सकेंगे। यह मॉडल भारत में कैंसर और हृदय रोग की दोहरी चुनौती से निपटने का एक मजबूत उपकरण साबित हो सकता है।

अब ब्रेस्ट कैंसर से पता चलेगा हार्ट रोग का खतरा

लाइफस्टाइल ही सबसे बड़ा इलाज

भले ही यह रिसर्च वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद अहम हो, लेकिन सच्चाई यह है कि लाइफस्टाइल ही असली कुंजी है। अगर हम अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो कैंसर और हार्ट दोनों बीमारियों के खतरे को काफी हद तक घटाया जा सकता है।

  • संतुलित आहार:
    हरी सब्जियां, साबुत अनाज, ताजे फल और फाइबर से भरपूर खाना न सिर्फ इम्यून सिस्टम मजबूत करता है, बल्कि हार्ट को भी सुरक्षित रखता है।
  • नियमित व्यायाम:
    30 मिनट की तेज चाल या हल्की एक्सरसाइज रोज़ाना करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और हार्ट हेल्दी रहता है।
  • तनाव नियंत्रण:
    कैंसर और हार्ट दोनों बीमारियों में स्ट्रेस एक बड़ा फैक्टर है। योग, ध्यान, और गहरी सांस लेने की तकनीकें बहुत मदद कर सकती हैं।
  •  पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन:
    नींद शरीर की हीलिंग प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी की पर्याप्त मात्रा लेने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।

इलाज के साथ देखभाल भी ज़रूरी

कैंसर के इलाज को लेकर अक्सर हमारा ध्यान ‘ जिंदगी बचाने’ पर होता है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम ‘ जिंदगी को बेहतर बनाने ‘ की भी सोचें। अगर यह मॉडल भारत में सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो डॉक्टर केवल कैंसर का इलाज नहीं करेंगे। वे मरीज के पूरे शरीर की सेहत को ध्यान में रखेंगे। यानी एक ऐसा मेडिकल सिस्टम, जहां इलाज सिर्फ बीमारी के लिए नहीं, इंसान के लिए होगा।

 

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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