सरकार ला रही नए आईटी नियम, अब हर एआई पोस्ट पर लगेगा ‘चेतावनी का लेबल’!
केंद्र सरकार आईटी नियम 2021 में संशोधन करने जा रही है। अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर एआई जनित फोटो, वीडियो या ऑडियो पर ‘एआई कंटेंट’ या ‘सिंथेटिक मीडिया’ का लेबल लगाना अनिवार्य होगा। डीपफेक और फेक एआई कंटेंट पर रोक लगाने के लिए जनता से 6 नवंबर 2025 तक सुझाव मांगे गए हैं।
नई दिल्ली : एआई (Artificial Intelligence) से तैयार झूठे वीडियो, फर्जी आवाज़ और भ्रम फैलाने वाले डिजिटल कंटेंट पर अब सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनित कंटेंट की पहचान और लेबलिंग अनिवार्य करनी होगी।
सरकार का सख्त कदम — ‘फेक एआई कंटेंट’ पर नियंत्रण के लिए नया प्रस्ताव
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि डीपफेक और फर्जी एआई कंटेंट समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। नए नियमों के तहत हर एआई से तैयार पोस्ट, फोटो या वीडियो पर ‘एआई कंटेंट’ या ‘सिंथेटिक मीडिया’ का स्पष्ट लेबल लगाया जाएगा, ताकि आम उपयोगकर्ता असली और नकली जानकारी में फर्क कर सकें।
मंत्रालय ने यह मसौदा सार्वजनिक कर दिया है और 6 नवंबर 2025 तक जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।
क्या होंगे नए प्रावधान?
- विजुअल कंटेंट पर ‘एआई कंटेंट’ या ‘सिंथेटिक मीडिया’ का लेबल कुल क्षेत्रफल के कम से कम 10% हिस्से में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।
- ऑडियो कंटेंट में यह घोषणा शुरुआती 10% अवधि तक सुनाई देनी चाहिए, ताकि श्रोता तुरंत पहचान सकें।
- सोशल मीडिया कंपनियों को तकनीकी साधनों के ज़रिए यह सुनिश्चित करना होगा कि अपलोड किया गया कंटेंट असली है या एआई-जनित।
- कंटेंट अपलोड करने वाले यूजर्स को एक ‘डिक्लेरेशन फॉर्म’ भरना होगा, जिसमें गलत जानकारी देने पर कार्रवाई की जा सक डीपफेक का बढ़ता खतरा
पिछले कुछ महीनों में भारत समेत दुनियाभर में डीपफेक वीडियो और नकली एआई ऑडियो के कई मामले सामने आए हैं।
मशहूर हस्तियों के चेहरे और आवाज़ का इस्तेमाल कर भ्रामक राजनीतिक संदेश, फर्जी विज्ञापन और ऑनलाइन ठगी के वीडियो बनाए जा रहे हैं।
मंत्रालय के अनुसार, “डीपफेक केवल किसी व्यक्ति की छवि को नहीं बिगाड़ता, बल्कि लोकतंत्र, पत्रकारिता और सार्वजनिक विश्वास को भी कमजोर करता है।”

सरकार का रुख — एआई को रोकना नहीं, जिम्मेदार बनाना
केंद्र सरकार का मानना है कि एआई नवाचार को रोकना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदारी के साथ बढ़ावा देना जरूरी है।
नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि रचनात्मक, शैक्षणिक और शोध-आधारित एआई प्रयोगों को रोका नहीं जाएगा।
सरकार पहले से ही सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ और भ्रामक सामग्री की निगरानी कर रही है, और अब यह सुनिश्चित करेगी कि प्लेटफॉर्म्स एआई कंटेंट पहचानने की तकनीकें अपनाएँ।
जनता से सुझाव आमंत्रित — “डिजिटल सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी”
मंत्रालय ने कहा, “फेक कंटेंट पर नियंत्रण सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर डिजिटल नागरिक की जिम्मेदारी है।
जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, तकनीक जिम्मेदार नहीं बन सकती।” नए नियमों के तहत सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है।
‘सुरक्षित डिजिटल भारत’ की ओर एक कदम
डीपफेक का खतरा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक चुनौती भी है। सरकार का उद्देश्य है कि भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सूचना के भरोसेमंद स्रोत बने रहें और कोई भी तकनीक सत्य को विकृत न कर सके।