क्या है गधों के गायब होने का खौफनाक ‘चाइना कनेक्शन’? पूरा सच पढ़कर सिहर जाएंगे!
मध्य प्रदेश में गधों की संख्या 49,000 से घटकर सिर्फ 3,052 रह गई है। कुछ जिलों में एक भी गधा नहीं बचा। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन में एजियाओ उद्योग के लिए गधों की खाल की बढ़ती मांग अवैध तस्करी और हत्या का कारण बन रही है।
कभी गांवों में बोझ ढोने और छोटे-मोटे सामान ले जाने में गधों की अहम भूमिका हुआ करती थी, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत कम रह गई है। ऐसे ही चौंकाने वाली आँकड़ें एक ताजा रिपोर्ट में आये है। मध्य प्रदेश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है। हाल ही में हुई पशुधन गणना के अनुसार पूरे राज्य में अब सिर्फ 3,052 गधे बचे हैं। साल 1997 में यह संख्या करीब 49,000 थी — यानी 94% की भारी कमी आई है।
9 जिलों में एक भी गधा नहीं बचा
राज्य के 55 जिलों में से 9 जिलों में एक भी गधा नहीं बचा है। इनमें दिंडोरी, निवाड़ी, सिवनी, हरदा और उमरिया जैसे जिले शामिल हैं।
नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा 332 गधे हैं, जबकि छतरपुर, रीवा और मुरैना में इनकी संख्या 200 से थोड़ी ज्यादा दर्ज की गई है।
मशीनों और वाहनों ने घटाई जरूरत
मशीनों और वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल, ईंट भट्ठों के बंद होने और काम की कमी के कारण अब गधों की जरूरत काफी कम हो गई है। इसके साथ ही, पालन-पोषण में बढ़ते खर्च और देखभाल की कठिनाइयों की वजह से लोग अब गधों को पालना नहीं चाहते। यही कारण है कि मध्य प्रदेश में गधों की आबादी लगातार घटती जा रही है।
चीन की मांग भी वजह हो सकती है
हालांकि गधों की संख्या क्यों घट रही है, इस पर अब तक कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है,
लेकिन पशु अधिकार कार्यकर्ता नरेश कादयान का कहना है कि इसके पीछे चीन की बढ़ती मांग एक बड़ी वजह हो सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से गधों को संकटग्रस्त प्रजाति घोषित करने की मांग की है ताकि इन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके।
कादयान के मुताबिक, चीन में “एजियाओ” नामक उद्योग के लिए गधों की खाल का इस्तेमाल किया जाता है।इस खाल को उबालकर जिलेटिन बनाया जाता है, जिसे पारंपरिक दवाओं, कामोत्तेजक और एंटी-एजिंग क्रीम में प्रयोग किया जाता है।
इस वजह से गधों की अवैध तस्करी और हत्या बढ़ रही है, जिससे इनकी संख्या तेजी से घट रही है।
बाकी पशुओं की स्थिति बेहतर
पशुधन गणना के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 3.75 करोड़ पशु हैं।
इनमें —
1.57 करोड़ गायें
1.02 करोड़ भैंसें
1.09 करोड़ बकरियां
करीब 5.5 लाख भेड़ें शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य में
9,971 घोड़े, 972 खच्चर, 2,896 ऊंट और 89,177 सुअर भी हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि गधों की तुलना में बाकी सभी पशुओं की स्थिति काफी बेहतर है।

गधों के विलुप्त होने का खतरा
गधों की घटती संख्या अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।अगर यही हालात रहे, तो आने वाले समय में गधे मध्य प्रदेश से पूरी तरह गायब हो सकते हैं।इसलिए जरूरत है कि सरकार और समाज मिलकर इनकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएं।