कैश इतना कि नोट गिनने की मशीन बुलानी पड़ी ! PWD इंजीनियर के ठिकानों पर मिला 3 करोड़ का सोना और करोड़ों रुपए

3 करोड़ का सोना, 36 लाख नकद और लग्जरी कारें मिलीं — भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जारी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व चीफ इंजीनियर जी. पी. मेहरा के घर और अन्य ठिकानों पर गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान टीम ने करीब 3 करोड़ रुपए का सोना, 36 लाख रुपए नकद, लग्जरी कारें, फिक्स डिपॉजिट और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के तहत की गई।
चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल के रोहित नगर, हबीबगंज, गोविंदपुर फैक्ट्री क्षेत्र और मणिपुर आवास सहित चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अभियान में चार डीएसपी सहित 30 से अधिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की टीम शामिल रही।
लोकायुक्त के अनुसार, छापेमारी के दौरान 36 लाख रुपए नकद, लगभग 3 करोड़ रुपए का सोना, 173 ग्राम चांदी, चार लग्जरी कारें, एक रिसॉर्ट और कॉटेज निर्माण से जुड़े दस्तावेज, तथा करीब 56 लाख रुपए की फिक्स डिपॉजिट रसीदें बरामद की गईं। नकद राशि की गिनती के लिए नोट गिनने की मशीन मंगवाई गई।
आय से अधिक संपत्ति का मामला
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जी.पी मेहरा ने सरकारी सेवा के दौरान विभागीय ठेकों और निर्माण कार्यों में गड़बड़ियों के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित की है।
लोकायुक्त का बयान
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के बाद बरामद संपत्ति का मूल्यांकन जारी है। प्राथमिक आकलन के मुताबिक, बरामद संपत्ति मेहरा की ज्ञात आय से कई गुना अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि “यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है और आगे की जांच में और भी खुलासे हो सकते हैं।”
इस कार्रवाई के बाद भोपाल समेत पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोकायुक्त की टीम अब जी.पी मेहरा के बैंक खातों, निवेश और अन्य संपत्तियों की भी जांच करेगी।
कौन हैं जी. पी. मेहरा?
जी. पी. मेहरा फरवरी 2024 में लोक निर्माण विभाग (PWD) से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट से पहले वे चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात थे। सेवा के दौरान वे प्रदेश के कई जिलों में पदस्थ रहे। लोकायुक्त की जांच में यह पाया गया कि सरकारी नौकरी के दौरान उन्होंने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति एकत्र करली थी।