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तेलंगाना में सड़कों पर संग्राम, DRONE से रखी जा रही नजर! ओबीसी को 42% आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद प्रदर्शन

तेलंगाना बंद – पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर सियासत गरमाई, कांग्रेस समेत कई दलों का समर्थन – 23 अक्टूबर को कैबिनेट की अहम बैठक तय

तेलंगाना बंद प्रदर्शन

तेलंगाना में आज यानी 18 अक्टूबर को माहौल कुछ अलग हैं। सड़कों पर पुलिस की चौकसी बढ़ी हुई है, दुकानों के शटर आधे खुले हैं, और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। वजह है तेलंगाना पिछड़ा वर्ग संयुक्त कार्रवाई समिति (बीसी जेएसी) की ओर से बुलाया गया तेलंगाना बंद। यह बंद पिछड़ा वर्ग को स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर बुलाया गया है।

राज्यभर में बंद के असर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं। पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है, खासकर हैदराबाद, वारंगल और निजामाबाद जैसे प्रमुख शहरों में। तेलंगाना पुलिस के महानिदेशक शिवधर रेड्डी ने चेतावनी दी है कि बंद के नाम पर किसी तरह की हिंसा या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी

आरक्षण पर हाई कोर्ट की रोक

दरअसल, तेलंगाना सरकार ने हाल ही में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाकर 42% कर दिया था। पहले यह संख्या काफी कम थी। सरकार का तर्क था कि राज्य की आबादी में पिछड़ा वर्ग बड़ी हिस्सेदारी रखता है, इसलिए उन्हें समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। लेकिन तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए “ट्रिपल टेस्ट फार्मूले” का पालन करना होगा। इस फार्मूले के तहत किसी भी राज्य को स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने से पहले तीन शर्तें पूरी करनी होती हैं:

  • पिछड़े वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का अध्ययन,
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनका पिछड़ापन साबित करना,
  • और कुल आरक्षण 50% से अधिक न होना।

चूंकि तेलंगाना सरकार के 42% ओबीसी आरक्षण के साथ एससी और एसटी आरक्षण जोड़ने पर कुल आरक्षण 67% तक पहुंच जाता है, इसलिए अदालत ने इसे रोक दिया।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तेलंगाना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और अदालतें उनके अधिकारों को मान्यता नहीं देंगी, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

इसी के चलते बीसी जेएसी ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। बीसी वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य सचिव जाजुला लिंगागौड ने सभी एससी, एसटी और बीसी संगठनों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस बंद को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक समुदाय की लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आवाज है।

हैदराबाद में रैली और राजनीतिक समर्थन

शुक्रवार को बंद से पहले हैदराबाद के बशीर बाग से लेकर लोअर टैंक बंड स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तक एक बड़ी रैली निकाली गई। इसमें न केवल पिछड़ा वर्ग संगठन बल्कि कई राजनीतिक दल भी शामिल हुए। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने भी इस बंद का समर्थन किया है।

कांग्रेस सरकार के समर्थन के बाद इस आंदोलन को और बल मिला है। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार पिछड़े वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलते ही 23 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में फिर से इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा।

क्यों उलझा हुआ है आरक्षण का मामला?

तेलंगाना सरकार की मंशा पिछड़ों को राजनीतिक तौर पर सशक्त बनाने की थी, लेकिन कानूनी दिक्कतें सामने आ गईं। दरअसल, भारत के संविधान में आरक्षण की सीमा 50% तय की गई है। यह सीमा सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार (1992) केस में तय की थी। तेलंगाना में पहले से 15% एससी और 10% एसटी आरक्षण है। ऐसे में 42% ओबीसी आरक्षण जोड़ने से यह सीमा पार हो जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के नियमों के खिलाफ है।

इसी वजह से अदालत ने सरकार से कहा कि पहले ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया पूरी करे और फिर आरक्षण लागू करे। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह मसला बेहद संवेदनशील बन गया है, क्योंकि तेलंगाना की राजनीति में बीसी वर्ग एक बड़ा वोट बैंक है।

बंद का असर और जनता की प्रतिक्रिया

हैदराबाद समेत कई शहरों में बंद का असर दिखा। कुछ इलाकों में बस सेवाएं प्रभावित रहीं, बाजारों में सन्नाटा दिखा, और स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई। हालांकि, कई स्थानों पर बंद शांतिपूर्ण रहा। पुलिस ने रणनीतिक इलाकों में निगरानी बढ़ाई और ड्रोन से भी नजर रखी जा रही है।

आम जनता की राय बंटी हुई है — कुछ लोग बीसी संगठनों के समर्थन में हैं और मानते हैं कि सामाजिक संतुलन के लिए आरक्षण बढ़ना जरूरी है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह का आंदोलन आम लोगों की दिक्कतें बढ़ा देता है और राजनीतिक लाभ के लिए जनता को परेशान किया जा रहा है।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेलंगाना सरकार फिलहाल कानूनी रास्ते पर चलना चाहती है। उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने कहा है कि “सरकार संविधान के दायरे में रहकर पिछड़े वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी। 23 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर नई रणनीति तैयार की जाएगी।”

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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