हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाया गया लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1A अब उड़ान भरने के लिए तैयार है। आज नासिक में इसकी पहली उड़ान होगी, और इस ऐतिहासिक मौके के गवाह खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बनेंगे।

तेजस का यह नया संस्करण भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण है। इसमें इस्तेमाल हुए करीब 65 फीसदी पुर्जे भारत में ही बने हैं, यानी यह असली ‘मेक इन इंडिया’ जेट है। पहले की तुलना में इसमें कई आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं, जिससे यह चौथी पीढ़ी का ताकतवर और हल्का लड़ाकू विमान बन गया है।
क्यों खास है तेजस?
तेजस मार्क-1A के डिज़ाइन और तकनीक में कई ऐसी खूबियाँ हैं जो इसे अनोखा बनाती हैं –
- यह छोटा, हल्का और बेहद फुर्तीला विमान है।
- इसे एक ही पायलट आसानी से संचालित कर सकता है।
- इसमें आधुनिक रडार सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जामिंग उपकरण और स्मार्ट वेपन कंट्रोल सिस्टम लगे हैं।
- दुश्मन के रडार पर पकड़ में आना मुश्किल है।
एक तरफ जहां तेजस अपनी गति और तकनीक से दुश्मन को मात देता है, वहीं दूसरी तरफ यह भारत की स्वदेशी ताकत को दुनिया के सामने पेश करता है।

तेजस मार्क-1A की रफ्तार और ताकत
तेजस मार्क-1A की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और क्षमता है। यह 2200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है, यानी आवाज़ की गति से लगभग दोगुनी! इसके अलावा यह विमान करीब 9 टन तक के हथियार लेकर उड़ान भर सकता है।
तेजस दुश्मन पर सटीक वार करने में भी माहिर है। यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। इसे बियॉन्ड विज़ुअल रेंज मिसाइल (BVR) यानी ऐसी मिसाइलों से लैस किया गया है जो दुश्मन को दूर से ही ढेर कर सकती हैं। इसके साथ ही इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट लगा है जो दुश्मन के रडार सिस्टम को भ्रमित कर सकता है। यानी यह न सिर्फ हमला करने में सक्षम है, बल्कि खुद को बचाने में भी माहिर है।
इस विमान को पश्चिमी सीमा के लिए बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात करने की योजना है। यह इलाका पाकिस्तान की सीमा से काफ़ी करीब है, इसलिए सामरिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
देरी की वजह और अब तक की तैयारी
असल में तेजस मार्क-1A को वायुसेना को दो साल पहले ही मिल जाना चाहिए
था, लेकिन इसमें देरी हुई। वजह थी, अमेरिकी इंजन की सप्लाई में रुकावट। इंजन समय पर नहीं मिलने के कारण विमान तैयार होकर भी उड़ान नहीं भर सका।
इस देरी पर वायुसेना प्रमुख ने एचएएल की आलोचना भी की थी। हालांकि, एचएएल का कहना है कि 10 तेजस मार्क-1A विमान पहले से तैयार हैं। जैसे ही इंजन मिलेंगे, इन्हें फिट कर ट्रायल किए जाएंगे और वायुसेना को सौंप दिया जाएगा। अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी से भारत ने 2021 में 99 इंजनों के लिए 5,375 करोड़ रुपये का सौदा किया था। हाल ही में इस कंपनी से चौथा इंजन भारत को मिल चुका है, जिससे अब प्रक्रिया तेज हो जाएगी। एचएएल की योजना है कि 2026 से हर साल 30 तेजस लड़ाकू विमान बनाए जाएं, ताकि वायुसेना की ज़रूरतें समय पर पूरी हो सकें।
वायुसेना के पास अब कितने लड़ाकू विमान हैं?
इस वक्त भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही है। वायुसेना को अपनी ताकत बनाए रखने के लिए 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत होती है, लेकिन अभी सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन ही बची हैं। पुराने मिग-21 विमानों के रिटायर होने से यह कमी और बढ़ गई है। इसी कमी को दूर करने के लिए तेजस जैसे स्वदेशी विमानों का तेजी से उत्पादन बहुत जरूरी है। वायुसेना का कहना है कि भारत में किसी भी रक्षा परियोजना को कंसेप्ट से लेकर डिप्लॉयमेंट तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है। यही वजह है कि अब रक्षा उत्पादन को गति देने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
भविष्य की योजना – और 97 तेजस विमानों का सौदा
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में एचएएल के साथ एक और बड़ा करार किया है। इसके तहत 97 और तेजस मार्क-1A विमानों की खरीद के लिए 62,370 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। इसमें 68 सिंगल सीटर और 29 ट्विन सीटर विमान शामिल होंगे। इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होकर अगले छह सालों में पूरी हो जाएगी। यानी अगले दशक में वायुसेना के पास तेजस का एक मजबूत बेड़ा होगा, जो देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा