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‘स्टालिन वोट के लिए फ्री वाइफ दे देंगे ‘ AIDMK सांसद के बयान से मचा बवाल, सोशल मीडिया पर क्या ट्रेंड कर रहा है अब ?

सी.वी. शनमुगम का विवादित बयान

AIDMK सांसद सी. वी. शनमुगम के बोल वोट के लिए ‘ मुफ्त पत्नी ‘

स्टालिन के इस बयान से तमिलनाडू की राजनीति में हलचल मचा दी हैं।

 

एआईएडीएमके (AIADMK) के सांसद सी. वी. शनमुगम के एक बयान ने पूरे तमिलनाडु में बवाल मचा दिया है। एक वीडियो में वे अपने समर्थकों से बात करते हुए मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर ऐसा विवादित बयान दे बैठे, जिसने राज्य की सियासत को हिला दिया है।

सांसद ने क्या कहा?

वीडियो में सी. वी. शनमुगम यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि “चुनाव से पहले स्टालिन लोगों को लुभाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। वह मुफ्त लैपटॉप, मिक्सी, ग्राइंडर, मवेशी और यहां तक कि ‘मुफ्त पत्नी’ देने की घोषणा भी कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जब एआईएडीएमके के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी सत्ता में थे, तो उन्होंने जनता को बिना मांगे ही ₹2500 दिए थे, लेकिन स्टालिन ने उससे भी ज्यादा वादे कर जनता को भ्रमित किया।

उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल में एक नई बहस छेड़ दी है। उनकी टिप्पणी महिलाओं पर थी। उन्होंने “महिलाओं की तुलना मुफ्त की वस्तुओं से” की, जो लोगों के बीच गुस्से की बड़ी वजह बन गई है।

डीएमके का पलटवार

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, डीएमके ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि एआईएडीएमके सांसद का यह बयान महिलाओं का अपमान है और इससे उनके दल की सोच साफ दिखाई देती है।
तमिलनाडु की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पी. गीता जीवन ने बयान जारी कर कहा, “सी. वी. शनमुगम ने महिलाओं को मुफ्त की चीजों की तरह दिखाकर पूरे समाज का अपमान किया है। यह बयान बेहद असंवेदनशील और निंदनीय है। इससे साफ होता है कि एआईएडीएमके महिलाओं के प्रति किस नजरिए से सोचती है।” उन्होंने आगे कहा “कि इस तरह की टिप्पणियाँ न केवल एक सांसद के पद की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि यह समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी गलत संदेश देती हैं।”

डीएमके प्रवक्ता की सख्त प्रतिक्रिया

डीएमके प्रवक्ता डॉ. सैयद हफीजुल्ला ने भी सांसद पर निशाना साधते हुए कहा कि यह टिप्पणी 21वीं सदी में भी पिछड़ी मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा,“एआईएडीएमके नेता महिलाओं को मुफ्त की वस्तु की तरह देखते हैं। यह बयान पेरियार और अन्ना जैसे नेताओं के सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनके नाम पर ये राजनीति करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सांसद का यह बयान न केवल तमिलनाडु की महिलाओं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के सम्मान पर हमला है। उन्होंने मांग की कि पार्टी को तुरंत कार्रवाई करते हुए शनमुगम से माफी मंगवानी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी गुस्सा

शनमुगम के बयान का वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर फैला, लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देना शुरू कर दीं।
एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #ShanmugamStatement और #RespectWomen ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स ने लिखा कि “यह वही पार्टी है जिसकी नेता जयललिता जैसी सशक्त महिला थीं, और आज उसी पार्टी के सांसद महिलाओं के लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बेहद शर्मनाक है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा “अगर एआईएडीएमके अपने सांसद पर कार्रवाई नहीं करती, तो यह साबित करेगा कि पार्टी भी इस सोच का समर्थन करती है।”

एआईएडीएमके की चुप्पी से बढ़ा विवाद

अब तक एआईएडीएमके की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी के प्रवक्ता और शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से परहेज़ किया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व इस बयान से परेशान है क्योंकि यह चुनावी समय में उनकी छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।

पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि शनमुगम का बयान “अति उत्साह में दिया गया राजनीतिक कटाक्ष” था, लेकिन विरोधी दलों ने इसे महिला विरोधी बताकर बड़ा मुद्दा बना दिया है। वहीं, कुछ नेता खुलकर कह रहे हैं कि सांसद को माफी मांगनी चाहिए ताकि जनता के बीच पार्टी की साख बनी रहे।

महिलाओं का गुस्सा और सामाजिक प्रतिक्रिया

तमिलनाडु में महिलाओं के अधिकारों पर काम करने वाले संगठनों और एक्टिविस्टों ने भी सांसद के बयान पर नाराज़गी जताई है। चेन्नई वीमेंस फोरम की अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के बयान यह दिखाते हैं कि कुछ राजनेता महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह देखते हैं, न कि बराबरी के नागरिक के रूप में।
उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं और यह जरूरी है कि ऐसे नेताओं को उदाहरण बनाकर सख्त सज़ा दी जाए।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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