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मंत्री ने कहा- ” किसानों को कर्ज माफी की लत”, किसान नेता की धमकी बोले- “हाथ-पैर काट देंगे”!

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के विवादित बयान

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के विवादित बयान ने बाढ़ और कर्ज से जूझ रहे किसानों के बीच आक्रोश बढ़ा दिया।

मंत्री ने कहा, “किसानों को कर्ज माफी की लत लग गई है,” जिसके बाद उन्होंने माफी मांगी।

 

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल अपने विवादित बयान को लेकर बुरी तरह घिर गए हैं। चोपड़ा तालुका के घोड़गांव में एक बैंक शाखा के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि “हम चुनावों में वादे इसलिए करते हैं क्योंकि हमें चुना जाना होता है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “किसानों को कर्ज माफी की लत लग गई हैं।” बाढ़ और भारी बारिश से तबाह किसानों के बीच यह बयान ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा लगा। मराठवाड़ा और विदर्भ के किसान पहले ही आर्थिक तंगी और सरकारी मदद की कमी से परेशान हैं।

‘हाथ-पैर काटने’ की धमकी मिली

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के विवादित बयान
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के विवादित बयान

 

पाटिल के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। बुलढाणा जिले के एक नेता ने तो गुस्से में पाटिल को ‘हाथ-पैर काटने’ की धमकी तक दे डाली। बढ़ते विवाद के बाद बाबासाहेब पाटिल ने माफी मांग ली, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ है। विपक्ष ने सरकार पर किसानों की पीड़ा को लेकर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है।

किसानों का नुकसान

मराठवाड़ा के कई गांवों में गन्ना, प्याज और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं है। खेतों में गाद भर जाने से आने वाले वर्षों तक खेती मुश्किल हो जाएगी।मातरेवाड़ी गांव के किसान लक्ष्मण पवार ने 80 हजार रुपये का कर्ज लिया था। बाढ़ में फसल डूबने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह कहानी अकेले लक्ष्मण की नहीं, बल्कि हजारों किसानों की है। कई किसानों के कृषि उपकरण, भंडार और बीज तक पानी में बह गए। अब उनके पास खेती दोबारा शुरू करने के लिए न पैसा बचा है, न हौसला।

मराठवाड़ा के आठ जिलों छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, धाराशिव, लातूर, परभणी, नांदेड़ और हिंगोली के किसान दशकों से सूखे और बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे हैं। कभी बारिश न होने से फसलें सूख जाती हैं, तो कभी अचानक आई बाढ़ सब कुछ बहा ले जाती है। 2023 में सूखे से जूझ रहे इन जिलों के लिए 59,000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित हुआ था, लेकिन किसानों के अनुसार उसका लाभ ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुंचा। अब 2025 की बाढ़ ने वही कहानी दोहरा दी है।

कितना हुआ नुकसान?

• अगस्त–सितंबर 2025 की बाढ़ से 29 जिले प्रभावित हुए।
• 68.69 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलों को नुकसान पहुंचा।
• 60,000 हेक्टेयर फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं।
• जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की।
• केवल मराठवाड़ा में 543 किसानों ने जान दी, जिनमें से बीड जिला (136 आत्महत्याएं) सबसे आगे रहा।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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