सुप्रीम कोर्ट में वकील राकेश किशोर ने CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की।
घटना खजुराहो में खंडित मूर्ति बहाली याचिका खारिज होने के बाद हुई।
CJI ने कोर्ट में शांति बनाए रखने और दलीलें जारी रखने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट में हमला – वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने आज सीजेआई बीआर गवई पर हमला करने की कोशिश की। आरोपी सीजेआई की डेस्क के पास गया और जूता निकालकर फेंकने का प्रयास किया। यह घटना उस समय हुई जब सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें रोक लिया। आरोपी वकील, राकेश किशोर 2011 से सुप्रीम कोर्ट बार में पंजीकृत हैं, कोर्ट से बाहर जाते समय उन्होंने नारा लगाया, ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।’
घटना के बाद CJI ने कोर्ट में मौजूद वकीलों को शांत रहने और अपनी दलीलें जारी रखने के लिए कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा और वे परेशान नहीं हैं।
आखिर क्यों किया हमला
सूत्रों के अनुसार, राकेश किशोर का नाराजगी का कारण CJI गवई की मध्य प्रदेश के खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची खंडित मूर्ति के मामले में की गई टिप्पणी थी। 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मूर्ति की बहाली की याचिका खारिज कर दी थी। CJI ने कहा था, “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो। तुम कहते हो भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो, जाओ उनसे प्रार्थना करो।”
CJI ने दी थी सफाई
इस विवादित मुद्दे पर CJI ने 18 सितंबर को स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान करते है। । बेंच में शामिल जस्टिस विनोद चंद्रन ने सोशल मीडिया को ‘एंटी-सोशल मीडिया’ बताते हुए कहा कि “ऑनलाइन गलत तरीके से प्रस्तुत बयान समस्या पैदा करते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ा कर दिखाए जाने की बात कही थी ।”
VHP ने क्या कहा
VHP के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने न्यायालय में संयम और न्याय पर विश्वास बनाए रखने की बात कही है । उन्होंने कहा कि “न्यायालय न्याय का मंदिर है और सभी का कर्तव्य है कि वाणी और आचार में संयम रखें, विशेष रूप से वकीलों और न्यायाधीशों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।”