विजय माल्या के 30 किलो सोने को लेकर विवाद, सबरीमाला मंदिर के सोने में क्या गड़बड़ी की गई ?
तिरुवनंतपुरम। सबरीमाला मंदिर में सोने की परत चढ़ाने को लेकर उठे विवाद को लेकर , त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने अब केरल हाईकोर्ट से मामले की सम्पूर्ण जांच की मांग की है।
बोर्ड अध्यक्ष पी. एस. प्रशांत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 1998 से 2025 तक मंदिर से जुड़ी सभी गतिविधियों की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि यह साफ़ हो सके कि कहीं कोई अनियमितता या गड़बड़ी तो नहीं हुई।
विवाद की जड़
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 1998 में विजय माल्या द्वारा दान किए गए 30 किलो सोने को लेकर सवाल उठे।
आरोप लगाया गया कि मंदिर में चढ़ाए गए सोने की मात्रा में कमी आई है और कुछ लोगों ने इस दान का ग़लत उपयोग किया।
टीडीबी अध्यक्ष का बयान
पी. एस. प्रशांत ने विपक्षी दलों, कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस मामले को लेकर देवस्वम बोर्ड और सबरीमाला मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि गोल्ड प्लेटिंग की पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई, हर कार्य त्रिभरणनम कमिश्नर, कार्यकारी अधिकारी और विजिलेंस अधिकारियों की निगरानी में हुआ और इसकी वीडियोग्राफी भी की गई।
2019 की गोल्ड प्लेटिंग और बरामदगी
विवाद का एक नया पक्ष 2019 से जुड़ा है, जब बेंगलुरु के व्यवसायी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने द्वारपालक मूर्तियों की प्लेटिंग प्रायोजित की थी।
हाल ही में उनके रिश्तेदार के घर से मंदिर की एक पीठिका बरामद हुई, जिसके बाद केरल हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए।
विपक्ष की मांग
विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने राज्य सरकार और टीडीबी से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि 30 किलो दान किए गए सोने में से अब तक कितना शेष है।
उन्होंने देवस्वम मंत्री, पूर्व मंत्री और दो पूर्व बोर्ड अध्यक्षों पर केस दर्ज करने की और सीबीआई जांच की अपील की है।
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