चिदंबरम के दावे पर उठे सवाल, बीजेपी बोली– विदेश नीति पर राहुल को पित्रोदा की सीख, देश की छवि हो रही प्रभावित

राहुल गांधी के दक्षिण अमेरिकी दौरे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। दरअसल, राहुल गांधी की इस यात्रा में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की मौजूदगी ने हलचल मचा दी है।
कुछ ही दिनों पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने यह बयान दिया था कि विदेश नीति से जुड़े मामलों में पित्रोदा राहुल गांधी को मार्गदर्शन नहीं करते। लेकिन बोगोटा में राहुल गांधी के साथ पित्रोदा की मौजूदगी ने उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पित्रोदा सिर्फ तस्वीरों में साथ खड़े होने के लिए मौजूद नहीं हैं, बल्कि विदेश यात्राओं के दौरान वे राहुल गांधी के सलाहकार और करीबी सहयोगी की भूमिका निभाते हैं।
राहुल गांधी इन दिनों चार देशों की यात्रा पर हैं। इस दौरे में वे राजनीतिक नेताओं, विश्वविद्यालयों के छात्रों और कारोबारी वर्ग से संवाद कर रहे हैं। उनकी इस अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी को कांग्रेस पार्टी वैश्विक स्तर पर अपने विचारों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रही है।
इधर, बीजेपी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेर लिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पित्रोदा के विचार कांग्रेस की वैचारिक सोच को स्पष्ट करते हैं और यही कारण है कि राहुल गांधी के बयान कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। बीजेपी का आरोप है कि राहुल की विदेश यात्राओं के पीछे पित्रोदा का दिमाग होता है और वही उनकी विदेश नीति की दिशा तय करते हैं।
गौरतलब है कि 90 वर्षीय सैम पित्रोदा लंबे समय से राहुल गांधी के विदेश कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अमेरिका और यूरोप की यात्राओं के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में बोगोटा की यात्रा में उनकी मौजूदगी कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह नई बहस को जन्म दे रही है।