ओवैसी ने कसा तंज, ‘आई लव मोदी’ हो सकता है, ‘आई लव मोहम्मद’ नहीं?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा में काफी तीखे शब्दों में सवाल खड़े किए कि भारत किसी को “आई लव मोदी” कहने पर मीडिया स्वीकार कर लेता है, लेकिन “आई लव मोहम्मद” लिखने पर विरोध क्यों हो जाता है।
ओवैसी बोले,
“हमारी मस्जिदें छीनी जा रही हैं। इस देश में कोई ‘आई लव मोदी’ तो कह सकता है, लेकिन ‘आई लव मोहम्मद’ नहीं। अगर मैं मुसलमान हूँ, तो मोहम्मद की वजह से हूँ।”
उन्होंने कानपुर में लगे “आई लव मोहम्मद” बोर्डों को लेकर कहा कि यदि जनता, मंच या जुलूस में यह बोला जाए, तो उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की नीतियों पर आरोप लगाया कि वे टारगेट करके कार्रवाई करते हैं।
संविधान और धार्मिक आज़ादी का हवाला
ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का ज़िक्र किया और कहा कि पैगम्बर मोहम्मद से प्रेम करना हर मुसलमान की आस्था का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि “आई लव महादेव” जैसे नारों को स्वीकृति मिल रही है, तो “आई लव मोहम्मद” पर प्रतिबंध क्यों होने चाहिए?
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस सत्ता पक्षों की ओर अधिक जवाबदेह होती है, न कि आम लोगों के लिए निष्पक्ष।
क्या है विवाद
यह विवाद तब बढ़ा जब कानपुर में एक धार्मिक जुलूस के मार्ग में “आई लव मोहम्मद” लिखा बोर्ड देखा गया। कुछ हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया और पुलिस ने इसपर एफआईआर दर्ज कर ली।