मौजूदा विधायकों के साथ संतुलन रखते हुए पार्टी का लक्ष्य 100 सीटें जीतना।
नई योजनाओं और स्थानीय नेतृत्व के दम पर सत्ता विरोधी लहर से निपटने की कोशिश

बिहार विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ एक महीने का समय बचा है। चुनाव आयोग 6 अक्टूबर के बाद कभी भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
इस बार बीजेपी का फोकस उन उम्मीदवारों पर है जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं। हालांकि, पार्टी नए और युवा चेहरों को आगे लाने में अभी भी थोड़ी हिचक दिखा रही है। बीजेपी का लक्ष्य है कि मौजूदा 80 विधायकों के साथ 100 से ज्यादा सीटें जीती जाएं। लेकिन राजद की मजबूत स्थिति को देखते हुए यह चुनौती आसान नहीं लग रही है।

भरोसेमंद चेहरों पर बीजेपी का दांव –
पार्टी ने तय किया है कि नए और भरोसेमंद नेताओं को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा जाएगा ताकि विपक्ष और सत्ता विरोधी लहर का सामना किया जा सके। बीजेपी चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जेडीयू के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि जल्दी ही इस पर सहमति बन जाएगी।
सरकारी योजनाओं पर जोर –
हाल के महीनों में बिहार सरकार ने कई नई योजनाएं लागू की हैं। खासकर “मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना” के तहत 75 लाख महिलाओं को 10,000 रुपये की मदद दी गई है। बीजेपी को उम्मीद है कि ऐसी योजनाओं से उसे जनता का समर्थन मिलेगा। पार्टी इन योजनाओं का प्रचार कर चुनाव में फायदा उठाना चाहती है।
विपक्ष की चुनौती –
विपक्ष भी पूरी तैयारी में है। हालांकि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका सही नहीं निकली, लेकिन विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार विपक्ष पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है।
मोदी के चेहरे पर चुनाव –
बीजेपी सांसदों का कहना है कि चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। साथ ही स्थानीय नेताओं और भरोसेमंद चेहरों की भूमिका भी अहम होगी। पार्टी का मकसद सिर्फ सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि विपक्षी ताकतों को रोकना भी है।
चुनाव आयोग जल्द ही बिहार का दौरा कर तारीखों का ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। सभी दल अपने उम्मीदवारों के चयन और समीकरण बनाने में जुट गए हैं।