भीड़ ने लगाई ‘जय श्रीराम’ की जयकार, लेकिन तेज प्रताप ने मंच से कहा—जानकी की धरती पर नारा हो ‘जय सियाराम’। मिट्टी माथे पर लगाकर धर्म और संस्कृति का भाव जगाया, समर्थकों को जोशीला बनाया और विरोधियों को चुप करा दिया।

सीतामढ़ी में जनशक्ति जनता दल की चुनावी सभा में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। जब भीड़ ने जोर-जोर से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए, तो तेज प्रताप ने तुरंत माइक संभाला और कहा, “सिर्फ जय श्रीराम नहीं, नारा ‘जय सियाराम’ होना चाहिए। यह जानकी की धरती है।”
उनका यह जवाब सुनते ही सभा में सन्नाटा छा गया, लेकिन फिर भीड़ ने तालियों से अभिवादन किया। मंच से मिट्टी उठाकर माथे पर लगाने का उनका यह प्रदर्शन स्थानीय धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान दोनों को जोड़ता दिख रहा है । तेज प्रताप ने कहा, “यह मिट्टी माँ धरती की जननी की है। इसे कोई नेता मंच से माथे पर नहीं लगाता, लेकिन हम लगाते हैं।”
सभा में उन्होंने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा, “हम शिक्षा के बल पर बिहार को फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे। नया सवेरा आएगा, सामाजिक न्याय जमीन पर उतरेगा।” यह वादा उनके भाषण में उत्साह और धार जोड़ने के साथ ही भविष्य के चुनावी विमर्श का हिस्सा बन गया। पटना से लेकर दिल्ली तक तेज प्रताप के इस बयान को सुर्खियां मिल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है, कि उनका यह कदम पिता लालू यादव की सामाजिक न्याय राजनीति को धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।