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दशहरा पर यहाँ नहीं रावण दहन ,देश की वो अनोखी जगहें जहाँ ‘दामाद’ और ‘महाविद्वान’ मानकर होती है लंकेश की पूजा, जानिए क्यों! 2025

दशहरा बिना रावण दहन – इन जगहों की अनोखी परंपरा

भारत की अनोखी परंपराएं, जहां रावण को दामाद और शिवभक्त मानते हैं

दशहरा

 

भारत में दशहरा अच्छाई की बुराई पर विजय का पर्व माना जाता है। ज्यादातर जगहों पर इस दिन रावण के विशाल पुतले जलाकर श्रीराम की जीत का उत्सव मनाया जाता है। लेकिन देश में कई ऐसी पावन जगहें भी हैं, जहां रावण को सिर्फ खलनायक नहीं, बल्कि शिवभक्त, विद्वान और दामाद मानकर पूजा जाता है।
वहीं, राजस्थान के मंडोर में भी रावण को दामाद मानकर उसका सम्मान किया जाता है, क्योंकि इसे मंदोदरी का मायका माना जाता है।

– प्रमुख स्थान

• हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश का बैजनाथ शिव मंदिर इसकी अनोखी मिसाल है। मान्यता है कि रावण ने यहीं शिवलिंग की स्थापना की थी। इसलिए यहां दशहरे पर रावण का दहन नहीं किया जाता। कहते हैं ऐसा करने से भगवान शिव अप्रसन्न हो जाते हैं।

• कुल्लू

इसी तरह, कुल्लू दशहरा तो यूनेस्को की धरोहर है, लेकिन यहां भी रावण दहन की परंपरा नहीं है। यहां लोक देवताओं की झांकियां और नृत्य पूरे उत्सव का केंद्र होते हैं।

• कानपुर

उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित दशानन मंदिर सिर्फ दशहरे के दिन खुलता है। यहां भक्त “जय लंकेश” कहकर रावण की पूजा करते हैं। मान्यता है कि उनकी नाभि पर तेल चढ़ाने से संतान सुख मिलता है।

• मंदसौर

मध्य प्रदेश के मंदसौर और विदिशा को रावण की पत्नी मंदोदरी से जोड़ा जाता है। इसलिए यहां रावण को दामाद और कुलदेवता का दर्जा दिया गया है। दशहरे पर यहां शोक मनाया जाता है, न कि दहन।

•छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के कांकेर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की आदिवासी परंपराओं में रावण को पूर्वज और शिवभक्त माना जाता है। यहां दशहरे पर रावण की आरती और भक्ति अनुष्ठान होते हैं।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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