इंदौर में दशहरे पर इस बार रावण नहीं बल्कि शूर्पणखा का दहन होगा।
संस्था ‘पौरुष’ ने 11 सिर वाले पुतले में सोनम रघुवंशी समेत 11 महिलाओं की तस्वीरें लगाई हैं, जिसे लेकर रघुवंशी समाज ने आपत्ति जताई।
इस बार इंदौर का दशहरा खास होने जा रहा है। दशहरे पर बुराई के प्रतीक, रावण का दहन किया जाता है, लेकिन इस बार शहर में शूर्पणखा दहन होगा। पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पौरुष (People Against Unequal Rules Used to Shelter Harassment) ने यह अनोखा आयोजन किया है। लेकिन सोनम रघुवंशी का पुतला लगाए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
11 सिर वाला शूर्पणखा पुतला
संस्था ने 11 मुख वाला शूर्पणखा का पुतला तैयार किया है। इसमें उन 11 महिलाओं की तस्वीरें लगाई जाएंगी जिन पर अपने पति, बच्चों और परिजनों की हत्या के आरोप हैं।
सबसे चर्चा सोनम रघुवंशी को लेकर है। पुतले के बीच वाले सिर में राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी की तस्वीर होगी, वहीं अन्य 10 महिलाओं की तस्वीरें भी साथ लगाई जाएंगी।

रघुवंशी समाज की आपत्ति
हालांकि, इस आयोजन को लेकर रघुवंशी समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। समाज के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने विजयनगर थाने और कलेक्टर ऑफिस में ज्ञापन सौंपकर पुतले से सोनम रघुवंशी की तस्वीर हटाने की मांग की है। समाज की ओर से रघुवंशी शब्द के इस्तेमाल को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
आयोजकों का पक्ष
संस्था प्रमुख अशोक दशोरा ने बताया कि अब तक दशहरे पर रावण के अहंकार का दहन होता आया है, लेकिन इस बार आपराधिक मानसिकता वाली महिलाओं के दुराचार और संस्कारहीनता को प्रतीक बनाकर दहन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “पुतले पर उन महिलाओं की तस्वीरें होंगी जिन पर अपने पति, बच्चे और ससुराल वालों की हत्या के आरोप हैं। समाज को यह संदेश देना जरूरी है कि ऐसे अपराधों से बचा जाए और लोग जागरूक हों।”
विधायक उषा ठाकुर का समर्थन
इस आयोजन को समर्थन देते हुए विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि रावण कोई व्यक्ति नहीं बल्कि बुराई का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जब मातृशक्ति ही षड्यंत्रकारी अपराधों में शामिल हो जाए तो धरती का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में समाज को जागरूक करने के लिए इन महिलाओं के पुतले जलाए जाने चाहिए।”