लेह हिंसा मामले में सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया।
विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज़ दबाने का आरोप लगाया।
नई दिल्ली/लेह: सोशल ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है । उन्हें जोधपुर की सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। लेह में हालत तनावपूर्ण है स्कूल कालेज बंद है और कर्फ्यू लगा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा को रोकने के लिए उठाया गया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने का प्रयास बताया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
गिरफ्तारी के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है । कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि वांगचुक को गिरफ्तार कर सरकार असल सवालों से ध्यान हटा रही है । उन्होंने केंद्र पर लद्दाख के साथ किए वादों से मुकरने का आरोप लगाया।
अरविंद केजरीवाल ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे तानाशाही बढ़ने का संकेत बताया।
उमर अब्दुल्ला ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहा और केंद्र से अपने वादों पर कायम रहने को कहा।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कर्फ्यू व इंटरनेट पर बैन जैसी स्थिति कश्मीर की पुरानी याद ताजा कर देती है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
वाम दलों ने भी राष्ट्रीय कानूनी प्रावधानों के दुरूपयोग की चेतावनी दी और सवाल उठाया कि क्या ऐसे कानून का उपयोग असहमति दबाने के लिए किया जा रहा है? कई विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो तुरंत रिहाई की जानी चाहिए।
वांगचुक और परिवार का बयान
सोनम वांगचुक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी गतिविधियाँ हमेशा शांति और विकास पर केंद्रित रही हैं और वे हिंसा के पक्षधर नहीं रहे। उनकी पत्नी ने भी कहा कि वांगचुक हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं और उन पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
क्या हुआ था ?
24 सितंबर को लेह में हुए प्रदर्शन और उसके बाद की हिंसा को भड़काने में वांगचुक की भूमिका को लेकर आरोप लगे थे । हिंसा में झड़प हुईं और कुछ मौकों पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा । प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनकी गिरफ्तारी और कुछ समय बाद हिरासत में रखने का फैसला किया। साथ ही इंटरनेट पर पाबंदी भी लागू की गई थी ताकि स्थिति नियंत्रित की जा सके।