9 साल जेल में रहने के बाद न्याय मिला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – सिर्फ शक से आरोप नहीं चल सकते

मुंबई: मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के बाद श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को अब फिर से कर्नल का रैंक मिल गया है। 31 जुलाई को मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपियों को बम ब्लास्ट केस से बरी कर दिया था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
कर्नल पुरोहित ने कहा कि “उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया था। उन्हें 9 साल तक जेल में रहना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई थी। 1994 में सेना में शामिल हुए श्रीकांत प्रसाद पुरोहित मराठा लाइट इन्फेंटरी से जुड़े थे।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि “केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।” पुष्ट सबूत न होने के कारण कर्नल पुरोहित को बरी किया गया। यह धमाका 29 सितंबर 2008 को मालेगांव (नासिक) में हुआ था, जहां मोटरसाइकिल पर रखा बम फटा था।
अभिनव भारत संगठन से जुड़ने के आरोप
कर्नल पुरोहित का नाम इस केस में दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत से जोड़ा गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने हिंदू राष्ट्र के लिए अलग संविधान और झंडा बनाने की योजना बनाई और गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं।
अन्य आरोपियों के नाम
इस केस में कर्नल पुरोहित के साथ कई अन्य नाम भी सामने आए थे, जिनमें शामिल हैं:
- पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर
- मेजर रमेश उपाध्याय
- अजय रहीरकर
- सुधार द्विवेदी
- समीर कुलकर्णी
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित करने लायक पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए।
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